चेंबरः क्रियेटिव का वोट बैंक तो बढ़ा, लेकिन गठजोड़ से निपटे दोनों राकेश व अजय गोयल
(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। मप्र चेंबर आफ कामर्स एंड इण्डस्ट्रीज के चुनाव में व्हाईट हाउस के प्रत्याशियों की हार के बाद अब दूसरे सबसे सशक्त ग्रुप क्रियेटिव हाउस के विभिन्न पदों पर हारे प्रत्याशी भी अब चुनावी थकान के बाद अपने काम पर लग गये है। इनकी हार के कारण कुछ भी हो, लेकिन हारने के बाद भी संयुक्त अध्यक्ष पद और उपाध्यक्ष पद पर रिकार्ड मतों से जीते सुरेश बंसल व संदीप नारायण अग्रवाल को लेकर यह सभी उत्साहित है। इनका मानना है कि चेंबर में जिस तरह से क्रियेटिव हाउस का वोट बैंक बढ़ा है, यह भविष्य के लिये बेहतर संकेत है।
क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी सचिव, सहसचिव और कोषाध्यक्ष पद पर हारे है। अध्यक्ष पद पर क्रियेटिव हाउस और व्हाईट हाउस के नेताओं ने गठजोड़ कर स्वतंत्र प्रत्याशी डा. प्रवीण अग्रवाल को हराने के लिये साजिश रची थी और इसी कारण अपना प्रत्याशी क्रियेटिव हाउस ने अध्यक्ष पद पर उतारा भी नहीं था। लेकिन स्वतंत्र उम्मीदवार डा. प्रवीण अग्रवाल ने न केवल व्हाईट और क्रियेटिव के रणनीतिकारों की प्लानिंग फेल की, बल्कि भविष्य के लिये भी यह संदेश दिया कि अब चेंबर में परिवारवाद व पटठेबाजी नहीं चलेगी और न ही धन बल पर चुनाव जीते जा सकेंगे, जो योग्य प्रत्याशी होगा, भले वह गरीब भी हो तो चुनाव लड़कर मठाधीश की साजिशों का चक्रव्यूह तोड़ सकता है।
अब क्रियेटिव हाउस के पराजित प्रत्याशियों की बात करते हैं। सबसे पहले सचिव पद पर हारे डा. राकेश अग्रवाल के संदर्भ में बता दें कि वह चुनाव तो पूरी मेहनत मशक्कत से लड़े, लेकिन व्हाईट के दीपक अग्रवाल से चुनाव हार गये।
सचिव पद पर हारे डा. राकेश अग्रवाल
डा. राकेश अग्रवाल वैसे चेंबर आफ कामर्स से लेकर व्यापारी व अग्रवाल समाज के संगठनों में बेहद सक्रिय है, लेकिन वह अपनी इस सक्रियता व बेहतर व्यवहार को जीत में नहीं बदल सकें। हम बता दें कि शुरू में डा. राकेश अग्रवाल जो पूर्व में चेंबर के उपाध्यक्ष रहे थे, उन्होंने संयुक्त अध्यक्ष पद पर लड़ने की प्लानिंग की थी और पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन ऐनवक्त पर सुरेश बंसल ने व्हाईट और क्रियेटिव हाउस की आपसी सेटिंग के चलते संयुक्त अध्यक्ष पद पर लड़ने का निर्णय कर लिया, तो मजबूरन डा. राकेश अग्रवाल को सचिव पद पर आना पड़ा। जबकि कहा जाता है कि डा. राकेश अग्रवाल और व्हाईट हाउस के दीपक अग्रवाल अच्छे मित्र भी थे, लेकिन इस चुनाव में दोनों आमने सामने आ गये। जिससे दोनों के सपोर्टर भी परेशान हो गये कि किसके साथ जाये।
कुल मिलाकर सचिव पद पर हारे डा. राकेश अग्रवाल भी थकहार कर बैठने वालों में से कतई नहीं है। वह अभी से अगले तीन साल की प्लानिंग में लग गये है। डा. राकेश अग्रवाल ग्वालियर में अग्रवाल समाज के एक बड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को बुलाकर व्यापारी व वैश्य समाज में अपना लोहा मनवा चुके हैं। डा. अग्रवाल अ.भा. अग्रवाल संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी है और आमतौर पर बड़े आयोजन करते रहे है। अभी हाल ही में उन्होंने अग्रवाल समाज के रीति रिवाजों, वैवाहिक रस्मों पर एक बड़ा आयोजन धरोहर करके सबको प्रभावित भी किया है। वह आजकल 22-23 अगस्त को लखनउ में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण शिविर की तैयारी में लगे है।
उन्होंने इस बात से इंकार किया कि चुनाव परिणाम से वह निराश है। डा. अग्रवाल ने कहा कि चुनाव तो एक माध्यम है, मैं तो सदा सेवा कार्य और लोगों को जोड़ने में लगा रहता हूं। मुझे तो सबसे संपर्क का मौका मिला, हर व्यापारी का स्नेह मिला। मैं अभी भी व्यापारियों व चेंबर सदस्यों के लिये हर प्रकार से लगा हूं, घर नहीं बैठा हूं और न बैठूंगा। मैं बता दूं कि मैं सुबह से घर से निकलकर रात को ही घर जाता हूं। इस तकनीकी युग में वह व्यापारियों को हर प्रकार से मार्गदर्शन भी देते रहते हैं।
सह सचिव पद पर हारे राकेश अग्रवाल
सहसचिव पद पर हारे राकेश अग्रवाल रेडीमेड ने चुनाव पूरी संजीदगी से लड़ा और अपने प्रतिद्वंदी प्रत्याशी व्हाईट हाउस के दीपक पमनानी की घेराबंदी भी की। राकेश अग्रवाल ने पहले चुनाव के बाद भी वोट भारी संख्या में लिये। उन्हें सुरेश बंसल के साथ साथ रहने का लाभ भी मिला। चेंबर का हर व्यापारी उनकी सज्जनता का कायल भी हुआ। राकेश अग्रवाल रेडीमेड का स्पष्ट कहना है कि उनकी ही कुछ कमी रह गई, जिस कारण चेंबर में वह निर्वाचित नहीं हो सकें। लेकिन वह हताश नहीं है, अभी भी व्यापारी समाज के लिये सबके साथ मिलकर काम कर रहे है। अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों का प्यार उन्हें मिला है वह कभी भूल नहीं पायेंगे। इसलिये वह अभी भी चेंबर सदस्यों के हर सुख दुख में साथ खड़े हैं।
कोषाध्यक्ष पद पर हारे अजय गोयल

कोषाध्यक्ष पद पर हारे क्रियेटिव हाउस के अजय गोयल चेंबर व समाज में बेहद सक्रिय हैं। अपनी हार से वह भौंचक्के हैं, लेकिन अब धीरे धीरे संयमित हो रहे हैं और फिर से अग्रवाल समाज, अग्रवाल नवयुवक संघ, वैश्य सम्मेलन में लगकर काम कर रहे हैं। यहां यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि अजय गोयल और उनकी टीम ने कोषाध्यक्ष पद पर जीत के लिये काफी मेहनत भी की, लेकिन सामने व्हाईट हाउस के प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा के मुकाबले पर वह सड़क पर कम आये। मनोज अग्रवाल ने एयर कंडीशंड आफिसों का मोह छोड़कर सबके साथ रहने का फंडा अपनाया और गत चुनावों की हार की सहानुभूति भी बंटोरी, वह अपने साथियों, मित्रों व वोटरों के सामने हाथ जोड़े ही खड़े रहे। जबकि अजय गोयल के चुनाव की कमान सम्हालने वाले क्रियेटिव हाउस के दिग्गज व चेंबर के पूर्व अध्यक्ष उनके बड़े भाई विजय गोयल अपने एयर कंडीशन कमरे से ही प्लानिंग करते रहे और अपने उन मित्रों को भी ज्यादा समय नहीं दिया, जो चुनाव बाजी पलट सकते थे। जबकि अजय गोयल को शुरू में सुझाव दिया गया था कि वह कोषाध्यक्ष की जगह सहसचिव पद पर लड़ जाये तो आसानी से चेंबर टीम में आ जायेंगे। लेकिन विजय गोयल ने व्हाईट हाउस के साथ टयूनिंग के चलते अजय गोयल को कोषाध्यक्ष पद पर लड़वाया, वह मनोज अग्रवाल बाबा को आसान केंडीडेंट समझ रहे थे। हालांकि अजय गोयल अब अपनी हार को भुलाकर दोगुने जोश से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि मैं आज चुनाव नहीं जीता तो क्या, लेकिन लोगों का प्यार मेरे साथ हैं और सबके साथ खड़ा हूं।