जीवन मे हमेशा याद रखे नाम,नमक और निशान का मंत्र -कर्नल अमन सिंह
ग्वालियर।हमे हमेशा नाम,नमक और निशान के मंत्र को जीवन मे उतारना चाहिए।समय -समय पर जीवन मे कई प्रकार की समस्याए आती है पर हमें हमेशा धैर्य के साथ डटकर उन समस्याओं का सामना करना चाहिए।सेना में एक अधिकारी को अपने जवान की हर गति विधि का ध्यान रखना पड़ता है कि वह कब उठता है कब सोता है।उसकी दिनचर्या क्या और उसके काम करने की कार्यशैली कैसी है।विपरीत परिस्थितियों में भी सेना डटकर दुश्मन का सामना करती है वैसे ही हमे भी अपने जीवन मे आने वाली हर समस्या का डटकर मुकाबला कर अपना नाम,देश का नमक और हमारी अनूठी छाप (निशान ) ध्यान रखना चाहिए ।ये बात ग्वालियर मैनेजमेंट एसोसिएशन (जीएमए) के तत्वाधान में आयोजित मासिक संवाद "युद्ध के मैदान से परे नेतृत्व" कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह, सेना मेडल (वीरता) ने कही।
कार्यक्रम का शुभारंभ जीएमए के अध्यक्ष डॉ.प्रवीण अग्रवाल ,लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह, सेना मेडल (वीरता),कार्यकारी निर्देशक प्रो.डॉ. मनोज पटवर्धन ,वरिष्ठ उपाध्यक्ष खालिद रहमान कुरैशी ,मानसेवी सचिव श्याम अग्रवाल,कार्यकारिणी सदस्य विनीत त्रिपाठी
ने दीप प्रज्वलित कर किया।
एक परिचय
भारतीय सेना के एक गौरवशाली एवं विशिष्ट लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह, सेना मेडल (वीरता) अधिकारी हैं, जिन्होंने 18 वर्षों की सैन्य सेवा के दौरान राष्ट्र की सुरक्षा, नेतृत्व और रक्षा नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे मूलतः चंडीगढ़, पंजाब के निवासी हैं तथा वर्तमान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीआरडीई), ग्वालियर में सिक्योरिटी ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान असाधारण साहस, नेतृत्व एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने के लिए उन्हें सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। उनका व्यापक सैन्य अनुभव जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वी लद्दाख तक फैला हुआ है। गलवान घाटी की घटनाओं के पश्चात वे भारत-चीन सैन्य प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रहे तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने हेतु आयोजित सैन्य-स्तरीय वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
मासिक संवाद कार्यक्रम के दौरान जीएमए के अध्यक्ष डॉ प्रवीण अग्रवाल ने आईटीएम यूनिवर्सिटी से आए छात्र -छात्राओं को संबोधित कर कहा कि हमारे देश की नींव आज के युवा पर ही टिकी हुई है।युवा सेना की इंटरशिप के साथ जुड़कर देश सेवा ,सैन्य सेवा में जाकर अपनी मातृभूमि की सेवा कर सकते है।इसके अलावा आगामी 18 अगस्त को चेम्बर ऑफ कॉमर्स में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जॉन कार्यक्रम में भाग ले सकते है।जीएमए के कार्यकारी निदेशक प्रो.डॉ. मनोज पटवर्धन ने कहा कि जीएमए के तहत शहर व अन्य जिलों में कई उद्यमियो ने अपने व्यापार को बढ़ा कर अपनी मंजिल तक पहुंचे।इन सब से मिलकर यूथ भी आगे बढ़कर अपनी मंजिल तक पहुंच सकते है।
ग्वालियर मैनेजमेंट एसोसिएशन के इस मासिक संवाद में इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (ITM), ग्वालियर के साथ विक्रांत यूनिवर्सिटी के छात्रों को भी प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
आईटीएम की भागीदारी इसलिए भी खास थी क्योंकि आईटीएम और जीएमए के बीच एक औपचारिक एमओयू है, जो एकेडेमिया-इंडस्ट्री के बीच सार्थक बातचीत, अनुभव-आधारित सीखने (experiential learning), प्रोफेशनल अनुभव और क्लासरूम से बाहर सीखने के अवसरों को मजबूत करता है।
आईटीएम कॉलेज ग्वालियर के स्टूडेंट्स को ऐसे ज्ञानवर्धक प्रोफेशनल मंच पर सक्रिय रूप से भाग लेते देखना बहुत अच्छा लगा। उनका उत्साह और जुड़ाव यह दिखाता है कि क्लासरूम की पढ़ाई को असल दुनिया के नेतृत्व अनुभवों से जोड़ना कितना महत्वपूर्ण है।