टालिन (एस्टोनिया)। उत्तरी यूरोप के मनोहारी देश एस्टोनिया के विश्वप्रसिद्ध जापानी गार्डन में उस समय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की दिव्य छटा बिखर उठी, जब श्री मतंगेश्वर सेवा समिति, खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा के संयोजन में संचालित विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा के अंतर्गत आटे के असंख्य शिवलिंगों का निर्माण, वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन-पूजन, मंत्रोच्चार एवं विश्व कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
अपनी अनुपम प्राकृतिक छटा, शांत वातावरण और कलात्मक सौंदर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध जापानी गार्डन केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य, शांति, सौहार्द और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले हजारों पर्यटक यहाँ प्रकृति की गोद में आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करने पहुँचते हैं। इसी पावन स्थल पर भारतीय वैदिक परंपरा के पवित्र मंत्रों की गूँज ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
वैदिक अनुष्ठानों के दौरान विश्व शांति, प्रेम, क्षमा, पर्यावरण संरक्षण एवं समस्त मानव जाति के मंगल की कामना की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों ने आटे से निर्मित असंख्य शिवलिंगों का पूजन कर भगवान शिव से विश्व में सद्भाव, करुणा, सहअस्तित्व और मानव कल्याण की प्रार्थना की।
इस अवसर पर पंडित शर्मा ने कहा कि इस विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा की प्रेरणा उन्हें आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं पंडित श्री देव प्रभाकर शास्त्री (दद्दा जी) से प्राप्त हुई है। उनके मार्गदर्शन से ही भारतीय संस्कृति के शाश्वत जीवन मूल्यों—प्रेम, क्षमा, करुणा, अहिंसा और "वसुधैव कुटुम्बकम्"—का संदेश विश्व के विभिन्न देशों तक पहुँचाने का यह सतत प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित मार्टिन कारो, जो अनेक बार भारत की यात्रा कर खजुराहो का भ्रमण कर चुके हैं, ने कहा कि खजुराहो विश्व धरोहर की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि यदि वहाँ अनावश्यक निर्माण कार्यों की अपेक्षा स्वच्छता, हरियाली, संरक्षण और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने पर अधिक ध्यान दिया जाए तो यह विश्व पर्यटन के मानचित्र पर और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी योजनाएँ बनाई जाएँ जिनसे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या निरंतर बढ़े और खजुराहो की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान अपनी मौलिक गरिमा के साथ सुरक्षित रहे।
इस पाँच दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में एस्टोनिया के स्थानीय नागरिकों का उल्लेखनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। विशेष रूप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अनुयायी, हरे रामा हरे कृष्णा (इस्कॉन) के भक्त, ओशो प्रेमी, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े साधक, डॉ. लीज, मार्टिन कारो, मिस अन्ना वेला, श्रीमती शिरली तथा स्थानीय स्कूली बच्चे आयोजन की व्यवस्थाओं, समन्वय एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनके सहयोग से बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा से जुड़कर वैदिक अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक सहभागिता कर रहे हैं।
विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का विश्वव्यापी अभियान बनकर विभिन्न देशों में शांति, प्रेम और मानव एकता का संदेश प्रसारित कर रही है।