भगवान को अप्रसन्न करता है जल का अपव्यय: पं मुद्गल
कांचमिल पार्क में शिव महापुराण कथा
ग्वालियर। हमारा यह शरीर और प्रकृति पंचतत्वों से मिलकर बनी है। जिसमें जल और वायु को विशेष महत्व है, लेकिन हम इन दोनों को ही बर्बाद करने पर तुले हैं। जल का अपव्यय करके तथा वायु को प्रदूषित करके हम न सिर्फ खुद का नुकसान कर रहे हैं, साथ ही भगवान को भी अप्रसन्न कर रहे हैं, क्योंकि प्रकृति ही ईश्वर है। यह विचार पं भूपेंद्र मुद्गल ने गुरूवार को कांचमिल नवीन पार्क मेंं आयोजित हो रही श्री शिवपुराण कथा के सांतवे दिन व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जल की एक-एक बूंद कीमती है, इसलिए हमें इसे सहेजकर रखना होगा, अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी। इसी तरह स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध हवा जरूरी है जिसके लिए हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। वृक्षों मेें देवताओं का वास होता है। पौधे लगाने से देवता प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि सांसारिक सुविधाओं में आनंद मत खोजो। असली आनंद तो शिवमय हो जाने में है। शिव की भक्ति से मनुष्य को वो सब कुछ मिल जाता है, जिसकी वह कामना करता है।उन्होंने कहा कि मोहल्ले पड़ोस या शहर में कहीं भी भगवान की कथा हो रही है तो बुलावे का इंतजार मत करो, क्योंकि भगवान की कथा में जाने के लिए किसी बुलावे की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि पुत्रमोह में इतने अंधे मत हो जाओ कि उसकी गलती भी नजर न आएं। ऐसा पिता जिसे अपने पुत्र की गलतियां नजर नहीं आती हैं. वो धृतराष्ट्र के समान हैं। बाद में जब वह अपराध करता है, तो उससे पूरा परिवार तहस नहस हो जाता है।
कथा विश्राम पर जन सहयोग जन कल्याण बहुउद्देशीय समिति के द्वारा आरती एवं व्यास पीठ का सम्मान किया। इस मौके पर पूर्व मंत्री बालेंदु शुक्ला,महाराज सिंह, राजेश सिंह, शशि सिंह, चारु राउत, गीता दीदी, निशा श्रीवास्तव, रूबी शर्मा,नीतू चौहान,उमा सिकरवार,अनीता शर्मा,रामभोग सिंह, रघुराज सिंह, सतवीर तोमर, धर्मवीर राजपूत, सूरज ,देवराज राजावत,राघवेंद्र भदौरिया, खुशबू तोमर सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।