ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा की त्रैमासिक गतिविधि के तहत गुरुवार को अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के तकनीकी शिक्षा संयोजक प्रो. मनोज कुमार गौर रहे। अध्यक्षता प्रो. हेमंत शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के विभाग संयोजक डॉ. राजकुमार वाजपेई और कार्यक्रम संयोजक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के नोडल अधिकारी प्रो. शांतिदेव सिसोदिया रहे।
प्रो. मनोज कुमार गौर ने कहा कि ऊर्जा के प्रभावी स्रोतों का दोहन करते समय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी है। तकनीक के सही ज्ञान के साथ ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग किया जाए, लेकिन भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी चिंतन होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। डॉ. राजकुमार वाजपेई ने भारतीय ज्ञान परंपरा में ऊर्जा स्रोतों के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. हेमंत शर्मा ने प्राकृतिक स्रोतों के महत्व को रेखांकित किया। वहीं प्रो. शांतिदेव सिसोदिया ने विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने और इस दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। अक्षय ऊर्जा दिवस के मौके पर निबंध प्रतियोगिता भी हुई। इसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिता में अर्थशास्त्र विभाग की प्रियंका दीक्षित, इतिहास विभाग के अभिषेक दुबे, मनोविज्ञान की ऐश्वर्या भार्गव, एमबीए बिजनेस इकोनॉमिक्स की काजल रावत, संग्रहालय विभाग की शिवी चौधरी और पुरातत्व विभाग की हनी राजा ने प्रथम स्थान हासिल किया। विजेताओं के साथ अन्य प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया। विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा पर आधारित चल चित्र भी दिखाया गया। इसके माध्यम से उन्हें अक्षय ऊर्जा के सही उपयोग और संवर्धन के लिए प्रेरित किया गया। प्रो. शांतिदेव सिसोदिया ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर नोडल केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा की भावना को आत्मसात कराना और अक्षय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।