हम हारे जरूर लेकिन रूके नहीं, चेंबर के पराजित प्रत्याशी बोले

ग्वालियर। मध्यप्रदेश चेंबर आफ कामर्स एंड इंण्डस्ट्रीज के चुनाव में बीते जुलाई माह के पहले पखबाडे में खूब जोर -शोर से प्रचार कर प्रत्याशियों ने व्यापार के व्यापारी हित में काम करने के लंबे- चौडे दावे दिये थे। चुनाव संपन्न होने के बाद विजयी प्रत्याशी तो अपने काम काज में लग गये है, और चेंबर में बैठकर काम भी करने लगे है, लेकिन पराजित प्रत्याशियों की क्या स्थिति है, उनके व्यापार व व्यापारी हित में खडे होने के दावों में कितनी सत्यता है , यह हमने परखा भी और देखा भी। कई  पराजित प्रत्याशी तो अभी तक चुनावों की थकान और हार से उबरे नहीं है । लेकिन इन सभी के दावे है कि हम चुनाव भले ही हारे है लेकिन हम रूके नहीं है, आज भी व्यापार व व्यापारी हित में सबसे पहले आगे खडे होंगे। व्यापारी भाई हमें आवाज तो दें, हम सब एक है।  

व्हाईट हाउस के पराजित प्रत्याशी
आज हम व्हाईट हाउस के पराजित प्रत्याशियों की बात करेंगे। व्हाईट हाउस ने कुल छह पदों में सभी 6 पदों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसमें व्हाईट हाउस सचिव सहसचिव, व कोषाध्यक्ष पद पर ही जीत हासिल कर पाया जबकि उसके अध्यक्ष संयुक्त अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर प्रत्याशी बुरी तरह हार गये।व्हाईट हाउस ने जबकि तीन पदों पर जीत हासिल की है, लेकिन अध्यक्ष पद पर पारस जैन की हार को व्हाईट हाउस के सर्वेसर्वा पचा नहीं पा रहे है इसी कारण व्हाईट हाउस सचिव पर पर दीपक अग्रवाल सहसचिव पद पर दीपक पमनानी व कोषाध्यक्ष पद पर मनोज अग्रवाल बाबा की जीत का जश्न अभी तक नहीं मना पाया है।

अध्यक्ष पद प्रत्याशी पारस जैन
मध्यप्रदेश चेंबर आफ कामर्स एंड इंण्डस्ट्रीज चुनावों में अध्यक्ष पद पर स्वतंत्र प्रत्याशी डा प्रवीण अग्रवाल से 200 गुना ज्यादा प्रचार -प्रसार व पैसा खर्च करने के बाद भी हारे पारस जैन हार से व्यथित है, पर मन नहीं हारा है। उनका कहना है कि में चुनाव जरूर हारा लेकिन प्रत्येक व्यापारी तक मैंने संपर्क किया, अपनी बात रखी । में आज भी अपनी बात पर कायम हूं। उनके सुख दुख में साथ खडा था, खडा हूं और आगे भी खडा रहूंगा।
पारस जैन इस बात से जरूर परेशान है कि उनके बारे में चुनाव प्रचार के दौरान तमाम भ्रांतियां फलाई गई। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद हम सभी साथ खडे होंगे। पारस ने दावा किया कि उनके पास पद नहीं है तो क्या , वह दोगुने जोश से चेंबर सदस्यों के साथ खडे हैं, उन्हें मौका मिलता तो वह अपने कार्यकाल में चेंबर का स्वर्णिम भविष्य और संवारते। पारस जैन ने खुशी जताई कि चुनाव के दौरान उन्हें सभी 3450 सदस्यों व उनके परिजनों का भरपूर स्नेह मिला। पारस जैन ने कहा कि चुनावों के दौरान दो-तीन माह से उनका व्यवसाय डिस्टर्व है अब वह उस पर भी ध्यान दे रहे है और भविष्य में व्यापार , समाज व चेंबर हित में ज्यादा बेहतर करने की प्लानिंग में लगे है।

संयुक्त अध्यक्ष प्रत्याशी विनोद जैन
वहीं व्हाईट हाउस के पराजित संयुक्त अध्यक्ष पद प्रत्याशी विनोद जैन अपने मारबल व्यवसाय में फिर से लग गये है। विनोद जैन को क्रियेटिव हाउस प्रत्याशी सुरेश बंसल ने 1600 से अधिक मतों से पराजित किया था। सुरेश बंसल जैसे अनुभवी व लोकप्रिय दिग्गज प्रत्याशी के सामने शुरू में व्हाईट हाउस प्रत्याशी उतारने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहा था। बाद में बमुश्किल विनोद जैन को ढूंढ कर लाया गया, लेकिन संयुक्त अध्यक्ष पद पर परिणाम यानी जीत हार पहले से सुरेश बंसल के कारण लगभग तय थी। विनोद जैन ने इसके बाद भी चुनाव पूरी संजीदगी से लडा और ईमानदारी से माहौल अपने पक्ष में करने की लाख कोशिशें भी की।
विनोद जैन का इस संदर्भ में कहना है कि हार जीत तो चुनावों का हिस्सा है । मेरा पहला चुनाव था  मैने पूरी कोशिश की कुछ कमी रह गई होगी मुझे इस बात की खुशी है कि में चेंबर सदस्यों का प्यार पा सका। उन्होंने कहा कि चेंबर व व्यापारी भाईयों के लिये वह सदा उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा उन्होंने इस चुनावों मे महसूस किया कि उन्हें अभी और मेहनत करने की जरूरत है, उन्हें कई व्यपारियों के सुझाव भी मिले है जिन पर  भविष्य में वह फोकस रखेंगे । उन्होंने कहा कि चुनाव तक हमारे हाउस थे, अब हम सभी व्यापारी व चेंबर सदस्य एक है।

उपाध्यक्ष पद प्रत्याशी सुनील अग्रवाल सन्नी
चेंबर चुनावों में उपाध्यक्ष पद पर क्रियेटिव के लोकप्रिय प्रत्याशी संदीप नारायण अग्रवाल से हारे व्हाईट हाउस प्रत्याशी सुनील अग्रवाल सन्नी अब सामाजिक कार्यो में व्यस्त है। वह अग्रवाल समाज के विभिन्न संगठनों से जुडे है और चेंबर चुनावों के बाद अपने व्यापार सन्नी पब्लिकेशन व श्याम टी कंपनी का काम देख रहे है। सन्नी ने कहा कि हार जीत तो होती रहती है हमें फिर नये संकल्प के साथ मेहनत करनी है। जिन्होंने उन्हें वोट दिया वह उनका भी आभार मानते है, और जिनका वोट नहीं मिला वह उनका भी दिल जीतेंगे। सन्नी ने कहा  कि वह व्यापार के साथ-साथ अब ग्वालियर के विकास के लिये भी काम कर रहे है। वह शिक्षा, स्वास्थ, सडकों की माली हालत सुधारने के साथ ही नये नये युवा उद्यमियों व व्यापारियों को भी ट्रेनिंग दे रहे हैं ताकि युवा जो ग्वालियर से पलायन कर रहे है, वह यहां रूकें व काम करें। ताकि उनके परिवार यहां एकल न रह पाये।

क्रमशः जारी

कल देखें क्रियेटिव के पराजित प्रत्याशी क्या बोले

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