शशि श्रेया: जहाँ शब्द नहीं, एहसास बोलते हैं
अदब-ए-लखनऊ_ की आवाज़, एहसासों की शायरा — _शशि जी_ को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ "
लोग आते हैं, सुनाते हैं और चले जाते हैं…
मगर कुछ आवाज़ें दिल के किसी कोने में ठहर जाती हैं।
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वही आवाज़ है लखनऊ की कवयित्री शशि श्रेया जी की "
कुछ व्यक्तित्व अपनी सादगी से पहचान बनाते हैं, तो कुछ अपनी वाणी से दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। लखनऊ की कवयित्री शशि श्रेया उन विरले नामों में हैं, जिनकी कविता केवल सुनाई नहीं देती, बल्कि आत्मा तक उतर जाती है। मंच पर उनकी मधुर प्रस्तुति, भावों की गहराई और लखनवी अदब से सजे शब्द श्रोताओं को ऐसा बाँध लेते हैं कि पूरा सभागार देर तक मंत्रमुग्ध रह जाता है।
उनकी हर रचना संवेदनाओं की एक नई दुनिया रचती है। वे केवल कविताएँ नहीं सुनातीं, बल्कि प्रेम, संस्कृति, मानवीय मूल्यों और जीवन के सुंदर भावों को अपनी लेखनी से जीवंत कर देती हैं। यही कारण है कि जहाँ भी उनकी आवाज़ पहुँचती है, वहाँ तालियों से पहले दिल धड़कते हैं।
_लबों पे अदब, अल्फ़ाज़ में नूर_ लिए चलती हैं
_शशि जी की _आवाज़ जब_ ग़ज़ल बनकर उतरती है,
हर दिल में बरसों तक अपना सुरूर लिए चलती है।
"शशि जी" को जन्मदिवस के इस पावन अवसर पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं आपका जीवन सदैव स्वस्थ, सुखमय, यशस्वी और सृजनशील बना रहे। आपकी लेखनी यूँ ही हिंदी साहित्य के आकाश को आलोकित करती रहे और आपकी मधुर वाणी अनगिनत श्रोताओं के हृदय में प्रेम, संवेदना और संस्कार का दीप जलाती रहे।
ईश्वर आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, असीम सम्मान और निरंतर साहित्य-साधना का आशीर्वाद प्रदान करें।
प्रभांशु शर्मा