आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप का हुआ आयोजन


- युवाओं को तनाव से निपटने के लिए सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, आत्म-अनुशंधान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम और मानसिक संतुलन को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिएः एक्सपट्र्स ट्रेनर डाॅ. ललिता गौरव

- तनाव को पूरी तरह समाप्त करने की बजाय उसे सही तरीके से प्रबंधित करना आवश्यक हैः डाॅ. ललिता गौरव

- योग, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली तनाव प्रबंधन के प्रभावी माध्यम हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय

- तनाव प्रबंधन केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने की एक निरंतर प्रक्रिया हैः प्रोफेसर इंदु मजूमदार

- स्वस्थ एवं तनावमुक्त वातावरण ही एक सकारात्मक और प्रभावी शैक्षणिक परिवेश के निर्माण की आधारशिला हैः डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक

-हैंड्स आन एक्टिविटी का हुआ आयोजन

ग्वालियर ।   आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के एनटीएफ सेल, योगा एंड मेडिटेशन क्लब इंन एसोसिएशन विद स्कूल आफ स्पोट्र्स एजुकेशन द्वारा दो दिवसीय‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप (समग्र तनाव प्रबंधन कार्यशाला) का आयोजन संस्थान के तुरारी परिसर स्थित मधुलिमये सभागार में किया गया। जहां एक्सपट्र्स ट्रेनर के रूप में डाॅ. ललिता गौरव (फाउंडर विनया योगा स्टूडियो, ग्वालियर) शामिल हुईं। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, आईटीएम स्कूल आफ स्पोट्र्स एजुकेशन की डीन प्रोफेसर इंदु मजूमदार, डीन एकेडमिक प्रोफेसर रंजीत सिंह तोमर, डीन स्टूडेंट वेलफेयर तृप्ति पाठक सहित विभिन्न विभागों के डीन, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उपस्थित होकर वर्कशाॅप में हिस्सा लिया। वहीं वर्कशाॅप का संचालन डाॅ. पूर्णिमा छेत्री द्वारा किया गया। 

प्रथम सत्र
युवाओं को तनाव से निपटने के लिए सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन, आत्म-अनुशंधान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम और मानसिक संतुलन को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिएः एक्सपट्र्स ट्रेनर डाॅ. ललिता गौरव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप‘ में एक्सपट्र्स ट्रेनर डाॅ. ललिता गौरव ने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए तनाव के प्रमुख कारणों एवं उनके मानसिक और शारीरिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में बढ़ता हुआ तनाव अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों का प्रमुख कारण बन रहा है। तनाव का प्रभाव हमारे मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र, हार्माेनल संतुलन तथा प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ता है, जिससे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अनिद्रा, चिंता, अवसाद एवं अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि नियमित योगासन, ध्यान, प्राणायाम तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर तनाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। 
योग, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली तनाव प्रबंधन के प्रभावी माध्यम हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय
‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप‘ में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक एवं तेज़ गति वाले जीवन में मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। छात्र-छात्राओं को तनाव का सकारात्मक प्रबंधन सीखकर आत्मविष्वास, एकाग्रता और जीवन में संतुलन विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास एवं मानसिक सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। ऐसी कार्यशालाएं छात्र-छात्राओं को स्वस्थ, सजग और सफल नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं। योग, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली तनाव प्रबंधन के प्रभावी माध्यम हैं। यदि छात्र इन्हें अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, तो वे न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, बल्कि जीवन की चुनौतियों का भी आत्मविष्वास के साथ सामना कर सकेंगे।
तनाव प्रबंधन केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने की एक निरंतर प्रक्रिया हैः प्रोफेसर इंदु मजूमदार
इससे पहले वर्कशाॅप के शुभारंभ अवसर पर स्कूल आफ स्पोट्र्स एजुकेशन की डीन प्रोफेसर इंदु मजूमदार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आज की तेज गति वाली जीवनशैली में तनाव एक सामान्य चुनौती बनता जा रहा है। शैक्षणिक दबाव, कार्य की व्यस्तता, समय का अभाव तथा व्यक्तिगत एवं सामाजिक अपेक्षाओं के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता एवं व्यवहार पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि तनाव प्रबंधन केवल तनाव कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने की एक निरंतर प्रक्रिया है। इसके लिए नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, उचित खान-पान, पर्याप्त नींद तथा सकारात्मक सोच को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से छात्र-छात्राओं को अपनी पढ़ाई एवं अन्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने और अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करने के लिए प्रेरित किया। 
तनाव को पूरी तरह समाप्त करने की बजाय उसे सही तरीके से प्रबंधित करना आवश्यक हैः डाॅ. ललिता गौरव
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप‘ के अंतर्गत संवादात्मक सत्र का भी आयोजन किया गया। जहां छात्र-छात्राओं और उपस्थित संकाय सदस्य व कर्मचारियों को अपनी जिज्ञासाएं एवं व्यक्तिगत अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया गया। उपस्थित छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों द्वारा विभिन्न पूछे गए सवालों का एक्सपट्र्स ट्रेनर डाॅ. ललिता गौरव ने सरल, व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान प्रस्तुत करते हुए उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि तनाव को पूरी तरह समाप्त करने की बजाय उसे पहचानना और सही तरीके से प्रबंधित करना आवश्यक है। 

द्वितीय सत्र
हैंड्स आन एक्टिविटी का हुआ आयोजन
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘होलिस्टिक स्ट्रैस मैनेजमेंट एंड मेंटल वेल-बींग‘ वर्कशाॅप‘ द्वितीय सत्र में हैंड्स आन एक्टिविटी का आयोजन संस्थान के स्पोट्र्स एरीना में आयोजन किया गया। जहां एक्सपट्र्स ट्रेनर डाॅ. ललिता गौरव एवं उनकी टीम ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, ध्यान एवं तनाव प्रबंधन की व्यावहारिक तकनीकों का अभ्यास कराया तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तनाव को जीवन से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन योग, ध्यान और सही जीवनशैली के माध्यम से उसे सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। स्वस्थ मन ही स्वस्थ शरीर और सफल जीवन की आधारशिला है।
स्वस्थ एवं तनावमुक्त वातावरण ही एक सकारात्मक और प्रभावी शैक्षणिक परिवेश के निर्माण की आधारशिला हैः डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक
वहीं वर्कशाॅप के अंत में डीएसडब्ल्यू तृप्ति पाठक ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञ, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्र-छात्राओं, संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य एवं सकारात्मक कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं तनावमुक्त वातावरण ही एक सकारात्मक और प्रभावी शैक्षणिक परिवेश के निर्माण की आधारशिला है।



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