जो खुद को मानव मानता है, वो मनुवादी: शास्त्री
ग्वालियर। जो लोग महाराज मनु को अपशब्द बोलकर मनृस्मृति का तिरस्कार कर रहे हैं, वो नासमझ हैं, उन्हें पता ही नहीं कि वो किससे गलत बोल रहे हैं।जो खुद को मानव मानता है वो मनुवादी है। यह विचार पं सुरेश शास्त्री ने पुरानी छावनी विद्या निकेत स्कूल के समीप जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि संतों का संग और भगवान की कथा दुर्लभ है। आज के युग में सच्चा संत मिल जाए तो जीवन का कल्याण निश्चित है। कथा के नाम पर आज मनोरंजन हो रहा है, यदि सही कथा सुनने को मिल जाए, जो जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पति यदि अनुकूल मिल जाए, तो जीवन वैकुंठ के समान हो जाता है और प्रतिकूल मिल जाए तो जीवन नर्क बन जाता है। उन्होंने कहा कि यदि बेटा-बेटी क ी सगाई कर दें तो विवाह में अधिक देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि आजकल मोबाइल से जो जितनी नजदीकी बढ़ रही हैं, उतनी ही जल्दी विच्छेद हो जाता है। उन्होंने कहा कि आप कितने ही बड़े हो जाएं, लेकिन कोई भी काम माता-पिता से बिना पूछे नहीं करना चाहिए। बराह अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि प्रथ्वी और धर्म की रक्षा के लिए भगवान ने बराह अवतार लिया। हिराण्य नाम के दैत्य जब भूदेवी( प्रथ्वी) को चुराकर पाताललोक में ले गया तो भगवान बराह ने उसका वध कर प्रथ्वी को मुक्त कराया। पंचतत्वों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर ही संसार मिला है। अंत में मानव इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है। इस मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा, अभय चौधरी, कमल माखीजानी, विश्व हिंदू परिषद के मनीष उपाध्याय, विनय जैन, सचिन पचौरी सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे। कथा परीक्षत सरोज प्रेम पचौरी ने व्यासपीठ की आरती की।