विशेष शिविर में 1134 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच, 365 हाई रिस्क गर्भवती चिन्हित
ग्वालियर। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ग्वालियर जिले की चिन्हित 32 स्वास्थ्य संस्थाओं में 9 एवं 10 जून को विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर श्रीमती रुचिका सिंह चौहान के मार्गदर्शन में आयोजित इन शिविरों में कुल 1134 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपाली माथुर ने बताया कि शिविरों का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ-साथ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) की पहचान कर उनका समय पर उपचार एवं सतत फॉलो-अप सुनिश्चित करना था, ताकि शून्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। जिला स्तर पर संकलित रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 1134 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण (एएनसी) किया गया। सर्वाधिक पंजीकरण सिविल अस्पताल डबरा में 168, सिविल अस्पताल बिरला नगर में 127 तथा जिला चिकित्सालय मुरार में 104 दर्ज किए गए। शिविरों के दौरान 365 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की श्रेणी में चिन्हित किया गया, जिनमें 85 महिलाओं में मध्यम जोखिम के लक्षण पाए गए। जांच के दौरान 13 महिलाएं गंभीर एनीमिया से ग्रसित पाई गईं। वहीं, शरीर में रक्त की कमी को दूर करने के लिए 39 महिलाओं को आयरन सुक्रोज थेरेपी प्रदान की गई। गर्भस्थ शिशु की स्थिति का आकलन करने के लिए 300 महिलाओं की निःशुल्क सोनोग्राफी कराई गई। साथ ही 150 महिलाओं को पीएलएससीएस संबंधी परामर्श तथा 80 महिलाओं को अन्य विशेष जांचों का लाभ दिया गया। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए 10 गर्भवती महिलाओं को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 110 महिलाओं को विशेष फॉलो-अप सूची में शामिल किया गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपाली माथुर एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आगामी अवधि के लिए त्रिस्तरीय कार्ययोजना भी निर्धारित की गई है। इसके तहत चिन्हित सभी 365 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव हेतु उनके प्रसव स्थल का पूर्व निर्धारण किया गया है। फॉलो-अप सूची में शामिल महिलाओं की नियमित निगरानी स्थानीय एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा की जाएगी। साथ ही सभी गर्भवती महिलाओं को संतुलित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच एवं संस्थागत प्रसव के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अभियान के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाते हुए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।