गोबर्धन पूजा करा के दिया प्रकर्ति पूजा का सन्देश जानकी वल्लभ शास्त्री जी
सिद्ध पीठ श्री गंगा दास जी की बड़ी शाला जगतगुरु पूर्ण बैराठी पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामसेवक दास जी महाराज के सानिध्य में चल रही श्री मद भागवत कथा में श्री धाम वृन्दावन से पधारे पंडित जानकी वल्लभ शास्त्री जी ने भगवान की सुन्दर बाल लीलाओ का वरण किया भगवान से ब्रज बसियो को आनंद देने के लिए सुन्दर सुन्दर लिलाय की प्रभु में माखन चोरी लीला कर गोपियों को आनंदित किया और जब गोकुल में बहुत उत्पात होने लगे तो नंद बाबा से सभी ब्रज बसियो के सहित गोकुल से वृन्दावन जाने का निश्चय किया और अभी गोकुल बासी वृन्दावन में रहने लगे वृन्दाबन आकर भगवान ने गऊ चारण किया और भगवान अपने सखाओ के साथ लिलाय करते है परमात्मा की लीला देख कर व्रह्मा भी भर्मित हो जाते बड़े बड़े योगी भी भगवान् की लीला को समझ नहीं पाते आज बो प्रभु अपने ब्रज बाशियो के साथ आन्दित हो रहे है व्यास जी ने बतया की भगवान ने गोवर्धन पूजा करा के प्रकृति की पूजा का संदेस किया हमें प्रकृति की हमेसा रक्षा करनी चाहिए क्यों की प्रकृति ही हमें सब कुछ प्रदान करती है इस लिए हमारा यह धर्म है की हमें प्रकृति की रक्षा करना चाहिए हमें जीवन वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए भगवान ने इंद्र की पूजा बंद करके गोबर्धन की पूजा कराई और श्री गिर्राज महाराज को छपन भोग लगाया गया सभी भक्तो ने श्री गिर्राज जी का पूजन किया एवं कथा में बाद वृन्दावन के कलाकारों के द्वारा सुन्दर रास लीला का मंचन किया जिसमे ऊखल बंधन की सुन्दर लीला का चित्रण किया गया और कुबेर के पुत्र को उद्धार प्रभु ने किया रास लीला में सभी भक्तो ने झांकी का दरसन किया इस अवशर पर जगद्गुरु द्वाराचार्य पूरन वैराठी स्वामी रामसेवक दास जी महाराज एवं कथा के परीक्षत श्री लीला धर शर्मा जी ने अपने परिवार के साथ गिर्राज जी का पूजन किया एवं छपन भोग लगाया