ग्वालियर। स्वच्छ स्कूल प्रतियोगिता के तहत मुरार एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कचरा प्रबंधन को लेकर उत्सुकता के साथ सवाल किए। बच्चों ने जानना चाहा कि गीले कचरे से खाद कैसे तैयार होती है, सूखे कचरे का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और सिंगल यूज प्लास्टिक का बेहतर विकल्प क्या हो सकता है। अधिकारियों ने विद्यार्थियों के सवालों का सरल एवं व्यावहारिक तरीके से जवाब देते हुए स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया समझाई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि घरों और स्कूलों से निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके, भोजन के अवशेष और अन्य जैविक कचरे को अलग एकत्रित कर जैविक प्रक्रिया के माध्यम से खाद तैयार की जा सकती है। गीले कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया से कचरे की मात्रा कम होने के साथ ही उपयोगी जैविक खाद भी प्राप्त होती है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि यदि गीले और सूखे कचरे को शुरुआत से ही अलग-अलग रखा जाए तो कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और पुन: उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को घर, स्कूल और आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने, गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा अन्य लोगों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करने की समझाइश दी गई।