सफलता के लिए मन का मौन, मधुर वाणी और ईश्वर के प्रति समर्पण आवश्यक: बीके श्रीकांत भाई
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पुराना हाईकोर्ट लाईन स्थित संगम भवन केन्द्र पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन केन्द्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से आध्यात्मिक अनुप्रयोग अनुसंधान केन्द्र (SpARC Wing, RERF) के राष्ट्रीय संयोजक राजयोगी बीके श्रीकांत भाई एवं बीके विनय भाई मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के शुभारंभ में बीके प्रहलाद भाई ने स्पार्क विंग का परिचय देते हुए बताया कि यह विंग आध्यात्मिक विषयों पर वैज्ञानिक एवं शोधपरक कार्य करता है। मुख्यालय एवं देश भर में समय-समय पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रहती है। आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक चिंतन एवं ध्यान का व्यक्ति के जीवन, व्यवहार और मानसिक स्थिति पर किस प्रकार सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इस दिशा में भी शोध एवं अध्ययन किया जाता है। मुख्य वक्ता बीके श्रीकांत भाई ने कहा कि जीवन में सम्पूर्ण सफलता और श्रेष्ठ व्यक्तित्व के निर्माण के लिए पांच विशेषताओं को जीवन में धारण करना आवश्यक है - साइलेंस, मन का मौन, मुख का मौन, ईश्वर के प्रति समर्पण तथा मधुर वाणी एवं सेवा भाव। ये पांच बातें व्यक्ति के जीवन को महान बना सकती हैं।
उन्होंने कहा कि मन का मौन अर्थात मन को व्यर्थ, नकारात्मक और अनावश्यक संकल्पों से मुक्त रखना है। मुख का मौन यह नहीं कि व्यक्ति बिल्कुल न बोले, बल्कि उसके बोल कम, मधुर, धीमे और सकारात्मक हों। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल का मौन भी आवश्यक है। मोबाइल का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करें, लेकिन उसे अपने जीवन और समय पर हावी न होने दें। बीके श्रीकांत भाई ने कहा कि जीवन में जब भी कोई समस्या, दुःख, अशांति या विघ्न आए, तो उसे परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना चाहिए। ईश्वर पर विश्वास और समर्पण व्यक्ति को परिस्थितियों में स्थिर रहने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि चेहरे की प्रसन्नता भी सफल और प्रभावशाली व्यक्तित्व की निशानी है। जीवन का वास्तविक लक्ष्य मानवता की सेवा होना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति के प्रति शुभभावना और शुभकामना रखनी चाहिए।
बीके विनय भाई ने कहा कि परमात्मा के ऊपर विश्वास रखते हुए सदैव आशावादी रहना चाहिए। लक्ष्य को सामने रखकर निरंतर गतिशील रहने तथा हर परिस्थिति में शुभ संकेतों को पहचानने की वृत्ति विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान सदैव सकारात्मक घटनाओं और अच्छे अवसरों को पहचानने में लगा रहे। उन्होंने कहा कि यदि हमारा चिंतन सभी के प्रति शुभ हो और सदैव शुभ रहे, तो जीवन की यात्रा सुखद एवं सुंदर बन सकती है। व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्यरत हो, सकारात्मक सोच, परमात्मा में विश्वास और शुभचिंतन उसके जीवन को नई दिशा और शक्ति प्रदान कर सकते हैं। अंत में बीके आदर्श दीदी ने सभी को अपने आशीर्वचन देते हुए सभी को राजयोग ध्यान की अनुभूति कराई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक चिंतन, ध्यान एवं राजयोग के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने के संदेश को आत्मसात किया।