- श्री सनातन धर्म मंदिर में श्रावण मास की प्रवचन माला का शुभारंभ
श्री सनातन धर्म मंदिर के रामशांति सभागार में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन माला का शुभारंभ परमपूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री विद्यानंद सरस्वती जी महाराज के सारगर्भित प्रवचन से हुआ। प्रवचन माला के शुभारंभ के अवसर पर महाराजश्री ने मंदिर परिसर में भगवान चक्रधर के दर्शन-पूजन किए तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
महाराजश्री ने कहा कि श्रावण मास का प्रारंभ श्रवण नक्षत्र से होता है, इसलिए इसे श्रावण मास कहा जाता है। श्रावण मास में हरिकथा एवं सत्संग का श्रवण अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। वेदान्त दर्शन में भी श्रवण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि हरि चर्चा एवं सत्संग के श्रवण से दो प्रमुख लाभ होते हैं। पहला, श्रवण से पापों का नाश होता है और दूसरा, जो तत्व हमारे लिए अज्ञात है, वह भी ज्ञात हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों और संतों ने जिन गूढ़ तत्वों को कठिन साधना, चिंतन एवं अनुसंधान के माध्यम से प्राप्त किया, वही तत्व सार रूप में संतों के वचनों एवं सत्संग के श्रवण मात्र से मनुष्य को प्राप्त हो जाता है। इसलिए जीवन में सत्संग और सद्विचारों का श्रवण अत्यंत आवश्यक है।
स्वामी विद्यानंद जी महाराज ने भगवान शिव की आराधना के संबंध में कहा कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अत्यधिक महत्व है। भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय है। उन्होंने शिव को प्रसन्न करने का सहज एवं सरल उपाय बताते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को मंत्र अथवा श्लोक नहीं आते हैं तो वह एक पात्र में शिवलिंग रखकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करते हुए शिवलिंग पर जलधारा अर्पित करे। इससे उसे रुद्राभिषेक का पूर्ण फल प्राप्त होता है। महाराजश्री ने कहा कि “शिवाश्रय प्राप्त करना चाहते हैं तो सद्भावना एवं शरणागति का भाव रखें।” महादेव शरणागति के भाव से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। सद्गुरु एवं परमात्मा से अनन्य भाव से कहिए— “हम तुम्हारे हैं।” इस भाव से परमात्मा शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा से एकांत में वार्तालाप करें, भगवान से अपना संबंध जोड़ें और उनके सुख-सुविधाओं का भी ध्यान रखें। भगवान को केवल मांगने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम एवं आत्मीयता के साथ अपना मानकर उनसे संबंध स्थापित करना चाहिए। महाराजश्री ने कहा कि “शिवम् शांतम्” भोलेनाथ के दर्शन करने और उन्हें जल अर्पित करने से चित्त को तुरंत शांति प्राप्त होती है। भगवान शिव केवल आराध्य देव ही नहीं, बल्कि शरणागत के आश्रयदाता हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक आपके जीवन में धर्म नहीं होगा, तब तक आप महादेव तक पहुंच ही नहीं सकते। भगवान शिव का वाहन नंदी धर्म का स्वरूप है। धर्म केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि जीवन को सदाचार, संयम, सत्य और सद्भावना से जोड़ने का मार्ग है। अंतर्मुखी वृत्ति वाला साधक ही महादेव को प्राप्त कर सकता है। इसलिए मनुष्य को बाहरी आडंबर से हटकर अपने भीतर झांकना चाहिए और परमात्मा से आत्मीय संबंध स्थापित करना चाहिए। प्रवचन के पश्चात “बोल हरि बोल, हरि हरि हरि बोल, केशव माधव गोविन्द बोल” के संकीर्तन से भक्त श्रद्धालु भक्ति भाव में झूम उठे।
इस अवसर पर सनातन धर्म मंडल के अध्यक्ष विजय गोयल, प्रधानमंत्री रमेश चंद्र गोयल ‘लल्ला’, कोषाध्यक्ष राकेश बंसल, प्रमोद अग्रवाल, पवन अग्रवाल, राजेश बंसल, मनोज सांघी, सुरेश बंसल, प्रवीण त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में भक्त श्रद्धालु उपस्थित रहे। महामंडलेश्वर स्वामी विद्यानंद जी महाराज के प्रवचन श्री सनातन धर्म मंदिर में 11 अगस्त तक प्रतिदिन सायंकाल 5 बजे से 7 बजे तक होंगे। भक्त श्रद्धालु प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक 15 खेड़ापति कॉलोनी प्रमोद अग्रवाल के निवास पर महाराज श्री से भेंट कर सकते हैं।