स्थानांतरण की भीड़ में कोई ईधर तो कोई उधर गया, उठे सवाल
- शारीरिक अक्षमता को भी नहीं समझा, कहीं भी भेजा
- अधिकारियों की नासमझी और लापरवाही से नहीं हो सके सही स्थानांतरण
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने तबादला नीति 2026 के तहत राज्य में 1 से 15 जून के बीच हजारों अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण किए हैं। कई मामलों में कर्मचारियों को उनकी मनचाही जगह के बजाय प्रशासनिक या अन्य कारणों से दूरस्थ जिलों में भेज दिया गया है, जिससे उन्हें निराशा हुई है। इससे वह काफी हताश और परेशान है। कई तो अपनी शारीरिक परेशानी से गृह जिले में स्थानांतरण चाहते थे, परंतु शासन ने उलट उन्हें काफी दूर भेज दिया। वहीं अब कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ खुद सरकार के कई मंत्रियों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस समय-सीमा को लगभग दो सप्ताह तक के लिये और बढ़ाने का आग्रह किया है। गलत हुये स्थानांतरणों के कारण लोग भोपाल में ईधर उधर भटक रहे है। तबादला तिथि बढ़ती है तो कर्मचारियों को राहत मिलेगी और वह अपने सही स्थानांतरण के लिये दोबारा पैरवी कर सकेंगे।
मध्यप्रदेश में तबादलों (ट्रांसफर) पर से प्रतिबंध हटने के बाद पिछले 16 दिनों में 17 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने पहले तबादलों की अंतिम तिथि 15 जून तय की थी, जिसे मंत्रियों की मांग और लंबित आवेदनों को देखते हुए 16 जून रात 12 बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया था। इसके बाद 17 जून को 29 बड़े आईएएस अधिकारियों और 150 से अधिक राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों की भी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। नई तबादला नीति 2026 के नियमों के तहत, जिन कर्मचारियों ने पिछले वित्तीय वर्ष में अपने निर्धारित टारगेट (लक्ष्य) पूरे नहीं किए थे, उन्हें उनकी पसंद के बजाय प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से दूरस्थ स्थानों पर भेज दिया गया है। इस बार सरकार ने नियम कड़ा किया था कि काम ठीक न होने पर 3 साल की अवधि पूरी होने से पहले भी ट्रांसफर किया जा सकता है, जिसके कारण कई लोग अचानक बदले गए स्थानों से परेशान हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए एक के बाद एक जुड़े हुए ट्रांसफर पर रोक होने के कारण भी कई कर्मचारियों को उनकी मनपसंद खाली जगहों पर पोस्टिंग नहीं मिल सकी।
शिक्षा विभाग में अभी ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए इसके बड़े ट्रांसफर आदेश आना बाकी हैं। शिक्षकों की यह प्रक्रिया 15 जुलाई 2026 तक जारी रह सकती है। वहीं अन्य विभागों जैसे नगर निगम, राजस्व, गृह व अन्य में अंतिम दिनों में सबसे ज्यादा फेरबदल देखने को मिला है। अकेले आखिरी दिन (16 जून) को ही करीब 2500 ट्रांसफर आदेश जारी किए गए। परंतु इन स्थानांतरणों में मनचाहा स्थान न मिलने से कर्मचारी हताश है। वहीं कईयों शारीरिक परेशानी के बाद भी मनचाहा स्थान नहीं मिला। वह अपने गृहस्थान पर स्थानांतरण चाहते थे परंतु उन्हें निराशा हाथ लगी है। शासन ने उनका पक्ष समझे बिना कहीं दूर स्थानांतरण कर दिया। इससे उनकी शारीरिक समस्या में और परेशानी खड़ी हो गई है। शासन में कई लोग ऐसे बैठे है जो बिना समझे ही कुछ तो भी अंधाधुंध स्थानांतरण कर रहे है।
तबादला तिथि आगे बढ़ाने की मांग
तबादाला नीति 2026 के तहत स्थानांतरण की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने की मांग चारों तरफ से उठ रही है। कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ खुद सरकार के कई मंत्रियों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस समय-सीमा को लगभग दो सप्ताह तक के लिये और बढ़ाने का आग्रह किया है। इस 15 दिन की अवधि में नगर निगम, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व सहित अन्य बड़े विभागों में ऑनलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि बड़ी संख्या में आए आवेदनों की स्क्रूटनी, जिला कोर कमेटी की सहमति और ऑनलाइन ई-ऑफिस सिस्टम के कारण अफसरों को सूचियां फाइनल करने में कम समय मिला। मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों ने अंतिम समय सीमा बीतने की बात कहकर तैयार सूचियों को रोक दिया, जिससे कई जरूरी तबादले अटक गए हैं। हालांकि, अधिकारियों द्वारा सूचियां रोके जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने केवल 24 घंटे की विशेष छूट दी थी, जिसके तहत 15 जून की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 16 जून रात 12 बजे तक किया गया ताकि पहले से तैयार सूचियां तुरंत जारी की जा सकें। 16 जून की रात को बढ़ी हुई मोहलत खत्म होने के बाद फिलहाल राज्य में तबादलों पर दोबारा प्रतिबंध लागू हो गया है।
पीड़ित कर्मचारियों के पास अब क्या विकल्प हैं?
मनचाही जगह न मिलने या गलत तरीके से हुए ट्रांसफर से निराश कर्मचारी तीन रास्तों को अपना सकते हैं:
- विभागीय अभ्यावेदन : कर्मचारी अपने विभाग के उच्चाधिकारियों या सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के समक्ष मानवीय आधार (जैसे गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की एक ही जिले में पोस्टिंग या रिटायरमेंट का नजदीक होना) का हवाला देकर आदेश में संशोधन का आवेदन कर सकते हैं.
- प्रभारी मंत्री से समन्वय: चूंकि जिला स्तर के तबादलों में प्रभारी मंत्रियों का अनुमोदन आवश्यक होता है, इसलिए कर्मचारी अपनी जायज समस्याओं को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मंत्रियों तक पुनर्विचार के लिए पहुंचा रहे हैं।
- हाईकोर्ट की शरण: यदि किसी कर्मचारी का ट्रांसफर नियमों का उल्लंघन करके या दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया है, तो वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ट्रांसफर ऑर्डर पर स्टे (रोक) की मांग कर सकते हैं।