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कवि सम्मेलन में कवियों ने रचनाएं सुनाकर मोहा मन......


श्री चित्रगुप्त प्राकट्य महोत्सव के चौथे दिन हुआ चित्रांश कवि सम्मेलन........
ग्वालियर। भगवान श्री चित्रगुप्त प्राकट्य महोत्सव के चौथे दिन आज रविवार को चित्रांश कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । जिसमें समाज के प्रबुद्ध कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं सुनाई।
भगवान श्री चित्रगुप्त प्राकट्य महोत्सव में आज कवि सम्मेलन को लेकर हकीम देवी प्रसाद रामप्यारी न्यास के सचिव अरुण कुलश्रेष्ठ एवं कार्यक्रम संयोजक श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि आज कवि सम्मेलन में शहर के चित्रांश कवियों ने अलग अलग रचनाएं पढ़ी जिसमें हकीम देवी प्रसाद रामप्यारी न्यास के अध्यक्ष अभय चौधरी ने कवि सम्मेलन की अध्यक्षता की,जिसमें मुख्य अतिथि अतुल अजनबी विशिष्ट अतिथि विजय कलीम विशिष्ट अतिथि नयन किशोर श्रीवास्तव( काव्य धारा मंच) अरुण कुलश्रेष्ठ संयोजक श्याम श्रीवास्तव आकाश श्रीवास्तव अमित सक्सैना सुरेंद्र खरे शशिकांत भटनागर हर्ष श्रीवास्तव वर्षा श्रीवास्तव एवं मंच संचालन कवि जग मोहन श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम उपरांत कवियों का स्वागत सम्मान पट्टिका मोतीमाला पहनाकर स्मृति चिन्ह देकर किया। कवियों की रचनाएं इस प्रकार रही.......
अपनी शक्ति पहचानें फिर से, जोड़े हर एक आवाज 
एकता की डोर थाम कर बड़े सभी हम साथ 

-नयनकिशोर श्रीवास्तव
हमने जब ऐतबार किया सर्द रात पर
सूरज उदास हो गया इतनी सी बात पर
-अतुल अजनबी
सुनते सुनते जग की बातें,कहने लगता है दिल मेरा।
चंद दिनों के इस जीवन में, क्यों करते हम मेरा
 तेरा।
-आरती अक्षत श्रीवास्तव
जय जय श्रृष्टि के लेखपाल।
जय कर्म धर्म के सत्य पाल।
हे जनम मृत्यु के रजिस्टार।
जय मानवता के मूर्तिकार।
-जगमोहन श्रीवास्तव
अपने सीने में कोई दर्द जगाए रखना 
सर्द मौसम है कहीं आग छुपाए रखना 
जानता है ये दिया भी कि बहुत मुश्किल है, 
शर्त जलते हुए सूरज से लगाए रखना।
-विजय 'कलीम'
इंसानियत का यारो ज़माना नहीं रहा
अब पहले सा चलन वो पुराना नहीं रहा।
-रवि कांत श्रीवास्तव 'दबंग'
नर रंग बिरंगा चोला है
कभी दोहा कभी रोला है
हर हाल में खुश खुश आदमी
कभी शबनम कभी शोला है
-- डॉ. विजय श्रीवास्तव ' करुण '
कलम सदा हथियार है जिनका , राह दिखाना काम है 
हम चित्रगुप्त के वंशज हैं कायस्थ हमारा नाम है।।
-डॉ विशाल सक्सेना 'विशेष'
फूलों से गीतों में मेरे मिल जाएंगे खार,
चुभन फूल की महके कांटे इस जीवन का सार।
-माला श्रीवास्तव अज्ञात
हम नदिया से हुए प्रवाहित पोषित किये किनारे 
मीठापन गाया नयनों में भरकर सागर खारे।
-डा संकल्प श्रीवास्तव
धरम पथ ही सदा चलना,धरम वरदान जैसा है,
धरम इतिहास का दर्पण धरम विज्ञान जैसा है,
-राजीव सक्सेना
हे चित्रगुप्त भगवान।
तुम्हरी महिमा बहुत महान।
जग में फैला है यशगान।
मिल कर गायें हम सन्तान।
हे चित्रगुप्त भगवान।
-अनिल राही

ब्रह्मा जी के चित्त में थे जो गुप्त रूप से लीन 
भय प्रकट लिए कलम किताब विद्या में थे प्रवीण 
- सुयश श्रीवास्तव

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