sandhyadesh

प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान के विधि विभाग का अलंकरण समारोह' का गरिमामय आयोजन

प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा आज दिनांक 26 अप्रैल 2026 को संस्थान के प्रांगण में माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री जितेंद्र कुमार माहेश्वरी जी का "अलंकरण समारोह" का भव्य आयोजन किया गया । इस गरिमामयी कार्यक्रम में न्यायपालिका की शीर्ष हस्तियों और शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। 
इस अवसर पर न्यायिक जगत की कई हस्तियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर हाई कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति श्री गुरपाल सिंह अहलूवालिया, माननीय न्यायमूर्ति श्री मिलिंद रमेश फड़के, माननीय न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोती, माननीय न्यायमूर्ति श्री अमित सेठ, माननीय न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री राजेश कुमार गुप्ता, श्री ज़ाकिर हुसैन जिला न्यायाधीश, सतर्कता, श्री दिपिन जैन (अध्यक्ष, गवर्निंग बॉडी, PIMRG), श्री धर्मेंद्र सिंह राठौर (रजिस्ट्रार जनरल), डॉ. राज कुमार आचार्य (कुलपति), जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, सुश्री सुमन श्रीवास्तव (सदस्य सचिव, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) विशेष रूप से उपस्थित रही । इन सभी न्यायमूर्तियों की उपस्थिति ने विधि के विद्यार्थियों के लिए इस आयोजन को और भी प्रेरणादायी बना दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में माननीय न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा दिए गए इस 'अलंकरण' और सम्मान के लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ. न्याय का सिंहासन केवल सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाने की एक पवित्र जिम्मेदारी है. विधि के विद्यार्थियों को यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि कानून का अंतिम लक्ष्य समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना है. आपकी पेशेवर नैतिकता ही समाज में आपकी विश्वसनीयता तय करेगी. आज जब हम इस न्यूज़लेटर का विमोचन कर रहे हैं, तो यह आपके शोध और कानूनी समझ की दिशा को दर्शाता है. युवा शक्ति ही इस देश के लोकतंत्र का भविष्य है, और आपकी तार्किक क्षमता ही आने वाले समय की न्यायिक दिशा तय करेगी.
विशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय न्यायमूर्ति आनंद पाठक प्रशासकीय न्यायाधीश, म.प्र. उच्च न्यायालय, ग्वालियर, ने अपने उद्बोधन में कहा कि न्यायपालिका समाज का वह स्तंभ है जिस पर आम आदमी का अटूट विश्वास टिका होता है. विधि के छात्रों के लिए यह आवश्यक है कि वे केवल धाराओं को न रटें, बल्कि कानून के पीछे की भावना और सामाजिक न्याय के मर्म को समझें. अनुशासन, निरंतर अध्ययन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण ही एक सफल अधिवक्ता की असली पहचान है. आज के इस डिजिटल युग में कानूनी चुनौतियाँ भी बदली हैं, इसलिए छात्रों को अपनी विश्लेषणात्मक सोच को और अधिक प्रखर बनाना होगा. मुझे खुशी है कि प्रेस्टीज संस्थान अपने विद्यार्थियों को ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जहाँ वे सीधे अनुभवी न्यायविदों से सीख पा रहे हैं.
श्री दिपिन जैन (अध्यक्ष, गवर्निंग बॉडी, PIMRG), ने कहा कि एक शिक्षण संस्थान की सफलता इस बात से मापी जाती है कि वह अपने विद्यार्थियों को कैसे आदर्श प्रदान करता है. न्यायमूर्ति माहेश्वरी जी और न्यायमूर्ति पाठक जी जैसे व्यक्तित्व हमारे छात्रों के लिए प्रेरणा के जीवित स्रोत हैं. प्रेस्टीज एजुकेशन फाउंडेशन का सदैव यह प्रयास रहा है कि हम केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करें. कानून का क्षेत्र निरंतर विकसित हो रहा है, और इस अलंकरण समारोह के माध्यम से हम अपने छात्रों को उस गरिमा और जिम्मेदारी का बोध कराना चाहते हैं जो इस पेशे की नींव है. भविष्य के इन विधि विशेषज्ञों से मेरी अपेक्षा है कि वे सत्य और न्याय के मार्ग को कभी न छोड़ें.
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) निर्मल्या बंद्योपाध्याय, ने कहा कि आज का दिन प्रेस्टीज संस्थान के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है. हमारे बीच देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की महान विभूतियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि हमारा संस्थान कानून की शिक्षा और मूल्यों के प्रति कितना गंभीर है. शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी सोच विकसित करना है जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके. आज जब हम माननीय न्यायमूर्ति माहेश्वरी जी का अलंकरण कर रहे हैं, तो हम वास्तव में उस न्यायनिष्ठा का सम्मान कर रहे हैं जिसे हमारे छात्र अपने जीवन में आत्मसात करेंगे. मैं आप सभी का इस शैक्षणिक परिसर में हृदय से अभिनंदन करता हूँ.
विधि विभाग की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) राखी सिंह चौहान, ने कहा कि निरंतर शैक्षणिक और व्यावहारिक कौशल के संगम का साक्षी बनता रहा है. हमारी प्राथमिकता छात्रों में न केवल कानून की समझ विकसित करना है, बल्कि उन्हें ड्राफ्टिंग, साक्ष्यों की परख और अदालती शिष्टाचार में भी निपुण बनाना है. विभाग द्वारा आयोजित 'युवा संसद' और आज का यह 'अलंकरण समारोह' इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं, ताकि हमारे छात्र किताबी ज्ञान से परे वास्तविक दुनिया की कानूनी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें. हम अपने छात्रों को भविष्य के न्यायविद् के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
समारोह के दौरान विधि विभाग के न्यूज़लेटर (Newsletter) का विमोचन भी गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया यह न्यूज़लेटर संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों और छात्रों के शोध कार्यों का एक दर्पण है। कार्यक्रम के अंत में, समारोह में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 
इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक तथा सह-समन्वयक सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव,सह-प्राध्यापक डॉ. अक्षय भार्गव मौजूद रहे तथा कार्यक्रम में संस्थान के सह-प्राध्यापक आबिल हुसैन, सह-प्राध्यापिका डॉ. दीक्षा भदौरिया सह-प्राध्यापिका रिचा मित्तल, सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी, सह-प्राध्यापक साहिल वर्मा तथा सह-प्राध्यापक डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा मौजूद रहे ।
कार्यक्रम का सफल संचालन सह-प्राध्यापिका मानसी गुप्ता द्वारा किया गया, जबकि अंत में सह-प्राध्यापिका जिज्ञासा वोहरा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

posted by Admin
9

Advertisement

sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
sandhyadesh
Get In Touch

Padav, Dafrin Sarai, Gwalior (M.P.)

98930-23728

sandhyadesh@gmail.com

Follow Us

© Sandhyadesh. All Rights Reserved. Developed by Anuj Mathur

<1-------Google-aNALY-------->