आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस पर हुआ 13वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन

- हमें ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे जो भारत की जरूरतों के अनुकूल होंः प्रोफेसर डाॅ. संदीप शुक्ला

- शिक्षक का योगदान केवल शिक्षण तक सीमित न रहकर समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में होना चाहिएः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह

- हमारे लिए वे सभी शिक्षक विजेता हैं जो ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ शिक्षण कार्य में लगे हैंः प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चैहान

- डॉ. राधाकृष्णन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षक समाज को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय

- विभिन्न कैटेगरीज में किया गया सम्मान

ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस पर 13वां डाॅ. एस राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर, आईटीएम ग्वालियर और आईटीएम ग्लोबल स्कूल ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में यूनिवर्सिटी के तुरारी कैंपस स्थित लियोनार्दो द विंची ब्लाॅक के उस्ताद अलाउद्दीन खान सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां विभिन्न कैटेगरीज के अंतर्गत सालभर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों व अन्य सहयोगियों को सम्मानित कर अवार्ड भी प्रदान किये गये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ट्रिपलआईटी हैदराबाद के डायरेक्टर प्रोफेसर डाॅ. संदीप शुक्ला शामिल हुए। इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह, प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चैहान, वाइस चांसलर प्रोफेसर डाॅ. योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार डाॅ. ओमवीर सिंह, डीन एडमिनिस्ट्रेषन डाॅ. प्रषांत श्रीवास्तव, डीन अकेडमिक डाॅ. रंजीत सिंह तोमर, डाॅ. सोनिया जौहरी, डाॅ. श्याम आकाशे, डाॅ. ऋचा कोठारी, डाॅ. पल्लवी खत्री, आईटीएम ग्वालियर की डायरेक्टर डाॅ. मीनाक्षी मजूमदार, आईटीएम ग्लोबल स्कूल की प्रिंसीपल गीता एस. सहित आईटीएम यूनिवर्स के डीन, विभाग प्रमुख, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षक मौजूद रहा।
हमें ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे जो भारत की जरूरतों के अनुकूल होंः प्रोफेसर डाॅ. संदीप शुक्ला
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में शिक्षक दिवस के अवसर पर 13वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद के डायरेक्टर प्रोफेसर डाॅ. संदीप शुक्ला ने ‘भारत में प्रौद्योगिकी शिक्षाः तकनीकी संप्रभुता प्राप्त करने के लिए एक पुनर्विचार‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का कार्य केवल कक्षा में पढ़ाना भर नहीं है, बल्कि समाज के प्रति भी उसकी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें छात्र-छात्राओं को न केवल कुशल पेशेवर, बल्कि अच्छा इंसान बनने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में तैयार किए गए प्रतिभाशाली छात्र बड़ी संख्या में विदेशों की ओर रुख कर लेते हैं और आज दुनिया की शीर्ष टेक्नोलॉजी कंपनियों में भारतीय नेतृत्व कर रहे हैं। बावजूद इसके, भारत की अपनी तकनीकी संप्रभुता अभी भी सीमित है। उदाहरण स्वरूप, उन्होंने उल्लेख किया कि आज हम ईमेल सेवाओं जैसे जी-मेल पर निर्भर हैं, जो कि विदेशी नियंत्रण में हैं। प्रो. शुक्ला ने कहा कि हमें ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे जो भारत की जरूरतों के अनुकूल हों। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हम अपनी खुद की टेक्नोलॉजी, सर्वर, क्लाउड सेवाएं और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें एआई को केवल तकनीकी विकास के साधन के रूप में नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे यह सोचें कि तकनीक के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन कैसे लाया जा सकता है।
शिक्षक का योगदान केवल शिक्षण तक सीमित न रहकर समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में होना चाहिएः चांसलर श्रीमती रुचि सिंह
शिक्षक दिवस के अवसर पर 13वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर में आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर की चांसलर श्रीमती रुचि सिंह ने शिक्षक दिवस की सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक शिक्षक का कार्य केवल छात्र-छात्राओं को नौकरी प्राप्त करने योग्य बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार सृजन की दिशा में भी प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षकों को केवल अकादमिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज की भलाई के लिए कार्य करने वाले उत्तरदायी नागरिक तैयार करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। चांसलर श्रीमती रुचि सिंह ने कहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार और सामूहिक उन्नति होना चाहिए। इसलिए शिक्षक का योगदान केवल शिक्षण तक सीमित न रहकर समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में होना चाहिए।
हमारे लिए वे सभी शिक्षक विजेता हैं जो ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ शिक्षण कार्य में लगे हैंः प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चैहान
शिक्षक दिवस के अवसर पर 13वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर के दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो-चांसलर डाॅ. दौलत सिंह चैहान ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्थान में शिक्षक समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अवार्ड प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि यह सम्मान उनके समर्पण और मेहनत का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि जिन शिक्षकों को इस वर्ष पुरस्कार नहीं मिल पाया है, उनका योगदान भी उतना ही सराहनीय और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वे सभी शिक्षक विजेता हैं जो ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ शिक्षण कार्य में लगे हैं। उम्मीद है कि अगले वर्ष उन्हें भी यह सम्मान प्राप्त होगा।
डॉ. राधाकृष्णन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षक समाज को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैंः वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय
शिक्षक दिवस के अवसर पर 13वां डाॅ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल लेक्चर के दौरान आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश उपाध्याय ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में महान शिक्षाविद और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके शिक्षकीय दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षक समाज को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक होते हैं। प्रो. उपाध्याय ने इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के शिक्षक सम्मान पुरस्कारों की घोषणा भी की और पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल शिक्षक की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि संस्थान की शैक्षिक गुणवत्ता और मूल्यों का भी प्रतीक है।
विभिन्न कैटेगरीज में किया गया सम्मान
शिक्षक दिवस के मौके पर आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के 53 कैटेगरीज, आईटीएम ग्वालियर के 20 कैटेगरीज और आईटीएम ग्लोबल स्कूल के 8 कैटेगरीज में षिक्षकों को सम्मानित किया गया। इसमें सभी लगभग 81 सम्मानित किए सदस्यों को सर्टिफिकेट और विषेष आईकार्ड भी प्रदान किये गये। 

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