भोपाल| मध्यप्रदेश को वैश्विक व्यापार, निर्यात और औद्योगिक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आयोजित 'मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट एवं फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कॉन्क्लेव-2026' में प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था और निर्यात संभावनाओं को लेकर व्यापक विमर्श हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में मनोज अग्रवाल ने सक्रिय भागीदारी करते हुए विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल के औद्योगिक विकास, नए निवेश, उद्योगों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने, प्लास्टिक पार्क की संभावनाओं तथा मेडिकल टूरिज्म के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चर्चा की।
5 नवंबर को भोपाल में आयोजित इस कॉन्क्लेव का शुभारंभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप द्वारा पोर्टल एवं पुस्तक के विमोचन के साथ किया गया। इस पहल का उद्देश्य मध्यप्रदेश के निर्यातकों को वैश्विक बाजारों, मुक्त व्यापार समझौतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और निर्यात संबंधी अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन मिल सकेगा।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल, MSME विभाग के सचिव श्री जॉन किंग्सली, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री उज्ज्वल कुमार घोष, MPIDC के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला, सचिव श्री स्वतंत्र कुमार सिंह सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे।
उद्योगों के लिए सरल भूमि आवंटन पर जोर
कॉन्क्लेव के दौरान मनोज अग्रवाल ने मध्यप्रदेश शासन के MSME विभाग के सचिव एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री जॉन किंग्सली के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और उद्यमी-अनुकूल बनाने के विषय पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जो वास्तविक उद्यमी नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं अथवा अपनी मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें औद्योगिक भूमि आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। कई बार भूमि आवंटन की जटिल प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के कारण गंभीर निवेशक भी अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में कठिनाई महसूस करते हैं।
ऐसे में वास्तविक उद्योगपतियों और निवेशकों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था औद्योगिक विकास को गति दे सकती है। इससे न केवल नए उद्योग स्थापित होंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर, सहायक उद्योगों का विकास और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भी होगा।
चर्चा में इस बात को महत्वपूर्ण बताया गया कि औद्योगिक भूमि का उपयोग वास्तविक उत्पादन गतिविधियों के लिए सुनिश्चित हो तथा निवेश करने के इच्छुक उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं में न उलझना पड़े।
ग्वालियर के प्लास्टिक पार्क को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा
ग्वालियर के औद्योगिक विकास की दृष्टि से प्लास्टिक पार्क भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। मनोज अग्रवाल ने प्लास्टिक पार्क में भूमि आवंटन और उद्यमियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर अधिकारियों के समक्ष विषय रखा।
उन्होंने प्लास्टिक उद्योग से जुड़े वास्तविक निवेशकों को आकर्षित करने, नई इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस विषय पर चर्चा के दौरान प्लास्टिक पार्क की व्यवस्थाओं में आवश्यक बदलावों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। आने वाले समय में इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव होने की उम्मीद जताई गई।
यदि भूमि आवंटन की प्रक्रिया और औद्योगिक सुविधाओं को निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाता है, तो ग्वालियर प्लास्टिक एवं उससे जुड़े विनिर्माण उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
मेडिकल टूरिज्म में मध्यप्रदेश की संभावनाओं पर विमर्श
औद्योगिक निवेश के साथ-साथ सेवा क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर विकसित करने की दृष्टि से मनोज अग्रवाल ने मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के मेडिकल एवं वेलनेस टूरिज्म के उप संचालक श्री रामकुमार तिवारी के साथ मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
इस दौरान मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, वेलनेस सेंटर, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और पर्यटन को एकीकृत कर मेडिकल टूरिज्म को विकसित करने के अवसरों पर विचार किया गया।
मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति, पर्यटन स्थलों, प्राकृतिक संपदा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को देखते हुए यह क्षेत्र भविष्य में निवेश और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक एवं क्षेत्रीय महत्व वाले शहर में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों के समन्वय से नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
ग्वालियर में 5,500 करोड़ रुपये के टेलीकॉम निवेश की संभावना
कॉन्क्लेव में प्रस्तुत औद्योगिक निवेश संबंधी आंकड़े ग्वालियर के भविष्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे।
प्रस्तुतीकरण के अनुसार, ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के अंतर्गत 24 कंपनियों के लगभग 5,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश का उल्लेख किया गया। इस परियोजना से लगभग 18,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना बताई गई। प्रस्तुतीकरण में जुलाई 2026 के दूरसंचार विभाग (DoT) के एमओयू का भी उल्लेख किया गया।
यह प्रस्ताव ग्वालियर को इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उपकरण और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। यदि प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरता है, तो इसका लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय MSME इकाइयों, सप्लायर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं और युवाओं के रोजगार तक पहुंचेगा।
इसके अतिरिक्त नर्मदापुरम के मोहासा-बाबई में सौर उपकरण निर्माण के लिए 31 इकाइयों के लगभग 56,960 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश तथा उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क के अंतर्गत 74 इकाइयों में 3,264 करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्लेख किया गया। उज्जैन में तीन दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ 780 करोड़ रुपये की मेडिकल उपकरण निर्माण इकाई की योजना भी प्रस्तुत की गई।
FTA से वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर
कॉन्क्लेव का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक पक्ष भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और उनके माध्यम से मध्यप्रदेश के उद्योगों को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसर रहे।
मनोज अग्रवाल ने 'Madhya Pradesh and Free Trade Agreements, Importance for Gwalior' विषय पर प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मुक्त व्यापार समझौते ग्वालियर सहित प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए बाजारों के द्वार खोल सकते हैं।
FTA के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने, निर्धारित शर्तों के अंतर्गत आयात शुल्क में रियायत प्राप्त करने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं बनती हैं।
ग्वालियर के लिए इसका विशेष महत्व है। यहां के MSME उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग उद्योग, टेक्सटाइल और अन्य विनिर्माण इकाइयां वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बना सकती हैं।
हालांकि इसके लिए उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, उत्पाद प्रमाणन, पैकेजिंग, निर्यात दस्तावेजीकरण, लॉजिस्टिक्स और संबंधित FTA के नियमों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक होगा। विशेष रूप से Rules of Origin यानी उत्पाद की उत्पत्ति से जुड़े नियमों की जानकारी निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है।
ग्वालियर के औद्योगिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल
समग्र रूप से मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट एवं FTA कॉन्क्लेव-2026 केवल निर्यात संबंधी जानकारी साझा करने का मंच नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद का अवसर भी बना।
ग्वालियर में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, प्लास्टिक पार्क में संभावित बदलाव, वास्तविक उद्यमियों को सरलता से औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने की पहल और मेडिकल टूरिज्म जैसे विषय इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आने वाले समय में ग्वालियर औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
मनोज अग्रवाल द्वारा अधिकारियों के समक्ष उठाए गए ये विषय स्थानीय उद्योगपतियों, नए निवेशकों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के हितों से सीधे जुड़े हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि नीतिगत चर्चाओं को समयबद्ध क्रियान्वयन में बदला जाए। उद्योगों को भूमि, आधारभूत सुविधाएं, वित्तीय सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच उपलब्ध हो। इससे ग्वालियर की औद्योगिक क्षमता को नई गति मिल सकती है।
मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में अब अगला महत्वपूर्ण पड़ाव केवल निवेश प्रस्ताव जुटाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर उत्पादन, निर्यात और रोजगार में बदलना है। इस दिशा में ग्वालियर के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।