फसल अवशेष प्रबंधन पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

ग्वालियर। कृषि विज्ञान केन्द्र, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में 2 से 6 नवम्बर तक आयोजित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ’“फसल अवशेष प्रबंधन”’ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वाई.पी. सिंह, निदेशक विस्तार सेवाएँ, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर उपस्थित रहे। प्रारंभ में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। 
इस अवसर निदेशक विस्तार सेवाएँ डॉ. वाई.पी. सिंह द्वारा अपने उद्बोधन में फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वर्तमान समय में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कृषि की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मृदा में उपलब्ध लाभकारी सूक्ष्मजीवों एवं जैविक पदार्थों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनका उपयोग जैविक खाद बनाने, मल्चिंग तथा मिट्टी में मिलाने के लिए करने की सलाह दी। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा ’’“फसल अवशेष प्रबंधन की उन्नत तकनीकियाँ”’’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया, जिसमें फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन हेतु विभिन्न आधुनिक तकनीकों एवं कृषि यंत्रों के महत्व की जानकारी प्रदान की गई। 
इसी क्रम में डॉ. राजीव सिंह चैहान द्वारा ’फसल अवशेष प्रबंधन रू समय की मांग एवं समाधान विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों तथा उनके वैकल्पिक उपयोग एवं प्रबंधन के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की। पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा पर्यावरण संरक्षण के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी।

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