आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में ‘कारगिल विजय दिवस‘ पर हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन
- कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य संकल्प, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैः डाॅ. संजय जोथे
- देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमारे सैनिक कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैंः एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. वीरेंद्र जैन
- तेरी मिट्टी में मिल जावां गुल बनके मैं खिल जावां इतनी से है दिल की आरजू...ः आयशा
ग्वालियर । आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आफ एजुकेशन द्वारा कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में ‘विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा‘ का आयोजन किया गया। जहां कारगिल में शहीद हुए जवानों को याद कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्कूल और एजुकेशन के एचओडी डाॅ. संजय जोथे शामिल हुए। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. वीरेंद्र जैन, डाॅ. प्रेरणा त्रिपाठी, डाॅ. ज्योति सेंगर, डाॅ आशीश वर्मा, कमलेश कुशवाह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। वहीं अंत में आभार प्रदर्शन डाॅ. सुमन त्रिपाठी द्वारा किया गया।
कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य संकल्प, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैः डाॅ. संजय जोथे
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा‘ का शुभारंभ कारगिल युद्ध में शहीद हुए 527 जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं स्कूल आॅफ एजुकेशन के एचओडी डाॅ. संजय जोथे ने ‘कारगिल की भौगोलिक परिस्थितियों में हमारे भारतीय जवान, किस प्रकार से देश की सेवा करते हैं‘ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल का दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र, अत्यधिक ऊंचाई, विषम मौसम और सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय जवान अद्वितीय साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य संकल्प, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखते हुए सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का आव्हान किया।
देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमारे सैनिक कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैंः एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. वीरेंद्र जैन
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित ‘विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा‘ के संयोजक एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. वीरेंद्र जैन ने कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक महत्व, भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य, त्याग एवं राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बाताया कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमारे सैनिक किस प्रकार कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। साथ ही छात्र-छत्राओं को वीर शहीदों के आदर्श से प्रेरणा लेकर, राष्ट्र हित, अनुशासन सेवा एवं नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
तेरी मिट्टी में मिल जावां गुल बनके मैं खिल जावां इतनी से है दिल की आरजू...ः आयशा
आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल आॅफ एजुकेशन द्वारा आयोजित ‘विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा‘ के अवसर पर छात्र-छात्राओं ने भी अपने ही अंदाज में वीर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जहां बीए बीएड द्वितीय वर्ष की छात्रा क्रशपी यादव ने वीर शहीदों की वीरता पर आधारित रचना पढ़ी। वहीं छात्रा यार उल फातिमा ने भी रचना पाठ किया। जिसके बोल थे ‘देश गौरव ही अभिमान...‘। चतुर्थ वर्ष की छात्रा प्रतिष्ठा कुमारी ने जवान सरहदों पर जब जागकर सुरक्षा करते हैं, जब हम अपने घरों के अंदर सुकुन से सो पाते हैं। ऐसे जवानों के परिवारों को भी सलाम है, जो अपने शहीद लाल की याद में अपना जीवन व्यतीत कर देते हैं। वहीं छात्रा आयशा ने देश भक्ति पर आधारित गाने की प्रस्तुति दी।
जिसके बोल थेः-
ओ वत्ना वे मेरे वत्ना वे... तेरी आएं समन जान तुझपे फिदा...।
तेरी मिट्टी में मिल जावां, गुल बनके मैं खिल जावां, इतनी सी है दिल की आरजू...।
तेरी नदियों में बह जावां, तेरे खेतों में लहरावां, इतनी सी है दिल की आरजू....।