ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में बुधवार को मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की भारतीय ज्ञान परंपरा की त्रैमासिक गतिविधियों के अंतर्गत गुरु पूर्णिमा समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. वायके जायसवाल थे। अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने की। विशिष्ट अतिथि प्रो. एसके द्विवेदी एवं प्रो. आईके पात्रो रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय ज्ञान परंपरा के नोडल अधिकारी प्रो. शांतिदेव सिसौदिया के स्वागत भाषण से हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. वायके जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। सच्चा गुरु स्वयं शिष्य को ढूंढ़ लेता है, उसे खोजने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुरु के प्रति विश्वास, अनुशासन और समर्पण बनाए रखना चाहिए। योग्य शिष्य और सच्चे गुरु का मिलन जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा ही सफलता का आधार है। प्रत्येक विद्यार्थी के मन में अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और विश्वास का भाव होना चाहिए, क्योंकि गुरु ही ज्ञान के माध्यम से जीवन को सफल बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रो. एसके द्विवेदी ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि छात्र को सही दिशा देकर उसकी दशा भी बदल देता है। प्रो. आईके पात्रो ने विद्यार्थियों से जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और गुरु के मार्गदर्शन में उसे प्राप्त करने का आह्वान किया। प्रो. शांतिदेव सिसौदिया ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इस अवसर पर अतिथियों का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. शांतिदेव सिसौदिया ने किया तथा आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में प्रो. विवेक बापट, प्रो. एसएन महापात्रा, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. गणेश दुबे, प्रो. राधा तोमर, प्रो. मनोज शर्मा, प्रो. जीके शर्मा, डॉ. सपन पटेल, डॉ. नवनीत गरूड़, डॉ. निमिषा जादौन, डॉ. सतेंद्र सिकरवार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, गेस्ट फैकल्टी, शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।