ग्वालियर। विजयाराजे शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मुरार में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा "अर्थशास्त्र में भारतीय ज्ञान परंपरा" विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपति डॉ. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेई ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
व्याख्यान में डॉ. वाजपेई ने प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल स्वरूप, उसकी विशेषताओं एवं वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिमी मूल्यों पर नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों पर आधारित है, जहाँ संसाधनों का वितरण संतुलन, समता और आवश्यकता के सिद्धांत पर होता है। उन्होंने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि एक माँ अपने सभी पुत्रों के साथ समान भाव से व्यवहार करती है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। यही दृष्टिकोण भारतीय अर्थचिंतन का मूल आधार है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.के. श्रीवास्तव ने की।कार्यक्रम में डॉ. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेई एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. कमलेश कुमार श्रीवास्तव का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. ज्योति उपाध्याय, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्यामलाल पांडवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मुरार के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार त्रिपाठी, महाराजा मानसिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सीताराम सिंह तोमर, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. राजीव सिंह चौहान, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. अवधेश कुमार निरंजन, डॉ. रूपेश पल्लव, डॉ. केशव देव सुनेरिया, डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, डॉ. संगीता सिंह, डॉ. बलबीर सिंह गुर्जर, सुश्री अंजु शर्मा, डॉ. कंचन सिंह नगेल सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. राजवीर सिंह किरार ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रजनी मिश्रा ने व्यक्त किया।