केवल किताबें नहीं, लेखन का अधिकार भी मिले : गोपाल किरन समाजसेवी संस्था ने विद्यार्थियों को वितरित की स्टेशनरी सामग्री
सरकार से सभी शासकीय विद्यालयों में निःशुल्क स्टेशनरी किट उपलब्ध कराने का किया आग्रह
ग्वालियर। शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों से पूर्ण होती है। इसी सोच को साकार करते हुए गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS) ने शासकीय कनिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सिरोली (मुरार), ग्वालियर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क स्टेशनरी सामग्री वितरित कर शिक्षा के प्रति अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया। संस्था की ओर से विद्यार्थियों को कॉपी, पेंसिल, रबर, स्केल, शार्पनर, डॉट पेन सहित आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बृजेश सिंह जादौन (आजीविका मिशन, जनपद मुरार) रहे, जबकि अध्यक्षता गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुआ, जिसका नेतृत्व विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को संविधान के मूल्यों, शिक्षा के महत्व, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम में वैशाली माखीजानी, राखी राठौर, अजय कुमार मिश्रा, रूना, मनीष उपाध्याय सहित UPES, देहरादून से गोपाल किरन समाजसेवी संस्था में इंटर्नशिप कर रहे दिव्यान मिश्रा, काव्या एवं प्रियांशु भी उपस्थित रहे। इंटर्न विद्यार्थियों ने भी बच्चों के साथ संवाद करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और सामाजिक संवेदनशीलता के महत्व से अवगत कराया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि सरकार द्वारा विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराना अत्यंत सराहनीय और स्वागतयोग्य कदम है, किंतु केवल पुस्तकें उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी विद्यार्थी के पास लिखने के लिए कॉपी, पेंसिल और अन्य आवश्यक स्टेशनरी सामग्री नहीं है, तो वह पुस्तकों का समुचित उपयोग नहीं कर सकता। इसलिए स्टेशनरी भी शिक्षा की मूलभूत आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गोपाल किरन समाजसेवी संस्था ने इसी कमी को महसूस करते हुए एक छोटी-सी सामाजिक पहल के रूप में विद्यार्थियों को स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराई है। साथ ही उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से आग्रह किया कि जैसे सभी शासकीय विद्यालयों में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की जाती हैं, उसी प्रकार प्रत्येक विद्यार्थी को एक संपूर्ण स्टेशनरी किट भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
श्री निमराजे ने बताया कि गोपाल किरन समाजसेवी संस्था वर्ष 1985 से शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय तथा सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था ने देश के विभिन्न राज्यों में विद्यालय विकास, छात्र सहायता, पौधरोपण, पर्यावरण जागरूकता, राष्ट्रीय कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, सम्मान समारोहों तथा सामाजिक अभियानों के माध्यम से अनेक जमीनी स्तर के आदर्श मॉडल विकसित किए हैं, जिन्हें जनसहभागिता आधारित विकास की सफल मिसाल माना जाता है।
उन्होंने कहा कि संस्था का विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण की शुरुआत विद्यालय से होती है और विद्यालय का सशक्तीकरण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि समाज और शासन मिलकर कार्य करें तो प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के इस सेवा कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की। शिक्षकों, अभिभावकों एवं स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यह पहल केवल स्टेशनरी वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरणादायी सामाजिक अभियान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार जनसहभागिता के माध्यम से शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को नई दिशा देती रहेगी।