महारास की लीला ही जीव आत्मा से परमात्मा से मिलन की लीला है ~~पंडित मनीष शास्त्री
*श्री कृष्ण रुक्मणी का विवाह हुआ संपन् बैंड बाजे और ढोल ताशे के साथ निकली श्री कृष्ण जी की बारात* ग्वालियर थाटीपुर स्थित कैलाश नगर में मंशापूर्ण माता मंदिर चल रही श्रीमद्भागवत भागवत कथा के षष्टम दिवस की कथा का वर्णन करते हुए भागवत आचार्य पंडित श्री मनीष कृष्ण शास्त्री ने महारास का वर्णन करते हुए बताया रास अध्यायी के पांच अध्याय श्रीमद् भागवत कथा के प्राण हैं इन पांच अध्यायों का प्रेम से गान करने पर भगवान की प्रेम और भक्ति प्राप्त होती है महारास में जीवात्मा और परमात्मा का मिलन होता है श्री कृष्ण का रसपान करने वाले को ही गोपी कहते हैं भगवान शिव स्वयं गोपी का भेष धारण करके महारास में आते हैं श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए शास्त्री जी ने बताया की जिसके जीवन में विवाह की समस्या आ रही हो किसी कन्या का विवाह में विलंब हो रहा हो तो है आज भी रुक्मणी की तरह पत्र लिखकर द्वारकाधीश के चरणों में अर्पित करें तो उसके विवाह की समस्याएं दूर हो जाती हैं इसी बीच भगवान श्री कृष्ण की बारात आ पहुंची और पंडित मनीष शास्त्री ने विधि विधान का मंत्र उच्चारण के साथ श्री रुक कृष्ण रुक्मणी का विवाह संपन्न कराया मंगल गीत गाए गए तत्पश्चात कथा स्थल पर क्षेत्र वासियों ने एवं श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कृष्ण, रुक्मणी एवं श्रीमद् भागवत कथा की आरती उतारी कथा के विश्राम में पंडित मनीष शास्त्री जी ने बताया कि कल सुदामा चरित की कथा होगी एवं कथा का विश्राम होगा