ग्वालियर। विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल सहरिया समुदाय के लोगों के जीवन में प्रधानमंत्री जनमन अभियान नई उम्मीद लेकर आया है। ग्वालियर जिले की जनपद पंचायत भितरवार की सुदूर ग्राम पंचायत घरसोंदी से एक छोटी सी आदिवासी दफाई जुड़ी है। इसी आदिवासी दफाई के निवासी भरोसीराम आदिवासी का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना पीएम जनमन अभियान (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान) के माध्यम से साकार हुआ है।
सहरिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले भरोसीराम आदिवासी के लिए हर बरसात एक कठिन परीक्षा की तरह आती थी। उनके पास टूटी-फूटी कच्ची झोंपड़ी थी, जिसमें पत्नी और चार बच्चों सहित छह सदस्यों का परिवार रहता था। बारिश में छत टपकती, दीवारें गलती और रातें डर में बीतती थीं। भरोसीराम अपने परिवार का गुजारा तो आसानी से चला लेते थे, पर आमदनी इतनी नहीं थी कि पक्का घर बनवा सकें। इसी बीच भारत सरकार द्वारा जनजातियों के समग्र विकास एवं मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री जनमन अभियान शुरू किया गया। जिसके तहत भरोसीराम का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (जनमन) में पंजीकृत किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास बनाने के लिए दो लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो गई। तीन किश्तों में भरोसीराम के खाते में सरकार ने धनराशि पहुँचाई। भरोसीराम ने पूरी लगन और परिश्रम से अपने घर का निर्माण किया और उनका पक्का मकान बनकर तैयार हो गया।
आज भरोसीराम के चेहरे पर जो संतोष और प्रसन्नता है, वह शब्दों में बयान करना मुश्किल है। वे कहते हैं कि पहले बारिश में कभी-कभी रात भर जागना पड़ता था। अब हम अपने घर की छत तले परिवार सहित चैन की नींद सोते हैं। बच्चे अब घर में पढ़ सकते हैं। यह घर सिर्फ दीवारें नहीं, हमारी खुशियों का आशियाना है। अब भरोसीराम की मेहनत की कमाई घर बनाने की चिंता में नहीं लगती, वे उसे अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार की बेहतरी में लगा रहे हैं। भरोसीराम आदिवासी को आवास निर्माण के साथ-साथ अनेक शासकीय योजनाओं का लाभ भी दिलाया गया है। जिनमें पक्का शौचालय, जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, नि:शुल्क राशन पर्ची, संबल कार्ड, बच्चों को छात्रवृत्ति, नल जल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल कनेक्शन, 90 दिवस की सुनिश्चित मजदूरी शामिल है।