पंजीकृत श्रमिकों को अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का सुनहरा अवसर


- इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ और स्नातक तक की नि:शुल्क पढ़ाई की सुविधा 
ग्वालियर । पंजीकृत श्रमिकों को अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए अब आर्थिक तंगी आड़े नहीं आएगी। प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत श्रम विभाग में पंजीकृत असंगठित श्रमिकों के बच्चों की स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, आईटीआई, इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार वहन करती है। श्रम विभाग में पंजीकृत ग्वालियर जिले के श्रमिकों को भी इस योजना का लाभ उठाने का सुनहरा अवसर है। 
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने जिले के पंजीकृत असंगठित श्रमिकों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाएं। उन्होंने श्रम विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे जिले के अधिकाधिक श्रमिक परिवार इसका लाभ ले सकें। तकनीकी शिक्षा संचालनालय द्वारा संचालित इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के माता या पिता का मध्य प्रदेश श्रम विभाग में असंगठित कर्मकार (श्रमिक) के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य है। स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, आईटीआई, इंजीनियरिंग, मेडिकल और लॉ (विधि) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्र इसके पात्र हैं। विस्तृत जानकारी के लिये सहायक श्रम आयुक्त के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है। 

उच्च शिक्षा के लिए इस प्रकार मिलती है आर्थिक सहायता 
इंजीनियरिंग (जेईई मेन्स में 1.5 लाख तक रैंक): शासकीय कॉलेज में पूरी फीस सरकार देगी। प्राइवेट कॉलेज में अधिकतम 1.50 लाख रुपये या वास्तविक फीस, जो भी कम हो।
मेडिकल (नीट के आधार पर प्रवेश): शासकीय एवं प्राइवेट दोनों कॉलेजों में एमबीबीएस/बीडीएस की पूरी फीस सरकार देगी। शासकीय कॉलेज के छात्रों को 2 वर्ष अथवा 10 लाख रुपये और प्राइवेट कॉलेज के छात्रों को 5 वर्ष अथवा 25 लाख रुपये का ग्रामीण सेवा बांड भरना होगा।
लॉ/कानून (क्लैट या स्वयं की परीक्षा से एनएलयू/दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश): शासकीय एवं एनएलयू कॉलेजों में पूरी फीस सरकार वहन करेगी।
सामान्य स्नातक, डिप्लोमा एवं आईटीआई: शासकीय कॉलेज में पूरी फीस सरकार देगी। इन पाठ्यक्रमों के लिए प्राइवेट कॉलेज पात्र नहीं हैं।
योजना के तहत प्रवेश शुल्क और वास्तविक शिक्षण शुल्क ही देय होगा। 

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