डिजिटल, पारदर्शी और सरल हुई नामांतरण प्रक्रिया
- अब 70 दिन की प्रक्रिया मात्र 20 से 25 दिन में हो रही पूरी
ग्वालियर । सुशासन, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में राज्य शासन द्वारा लागू की गई “साइबर तहसील 2.0” पहल राजस्व प्रणाली में ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण परिवर्तन का माध्यम बनी है। ग्वालियर जिले में भी भूमि नामांतरण प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। साथ ही इस व्यवस्था से नागरिक सुविधाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाया गया है।
राज्य सरकार ने साइबर तहसील व्यवस्था की शुरुआत “साइबर तहसील 1.0” के रूप में की थी। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में पूर्ण खसरा से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को शामिल किया गया था। रजिस्ट्री के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती थी और मैन्युअल हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा गया था। इस व्यवस्था की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाते हुए “साइबर तहसील 2.0” लागू की। इसमें अब आंशिक खसरा, अर्थात भूमि के किसी हिस्से की बिक्री से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को भी केन्द्रीकृत डिजिटल प्रणाली में शामिल किया गया है। आंशिक खसरा से जुड़े मामले तकनीकी रूप से अधिक जटिल माने जाते हैं, क्योंकि इनमें भूमि के हिस्से का सीमांकन, रिकॉर्ड संशोधन और संबंधित जानकारी का सटीक अद्यतन आवश्यक होता है। “साइबर तहसील 2.0” ने इस चुनौती का समाधान डिजिटल तकनीक से किया है। इससे राजस्व रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। साथ ही भूमि संबंधी विवादों की संभावनाओं में भी कमी आई है।
“साइबर तहसील 2.0” वर्तमान में जिले की सभी तहसीलों में प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। इस व्यवस्था के तहत तहसील कार्यालय रीयल-टाइम समन्वय से कार्य कर रहे हैं। केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली से प्रकरणों की निगरानी, प्रगति की समीक्षा और समयबद्ध निराकरण अधिक प्रभावी हुआ है। “साइबर तहसील 2.0” केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की प्रभावी पहल बनकर उभरी है। ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे नागरिकों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल राजस्व प्रणाली में डिजिटल सुधारों का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरी है। “साइबर तहसील 2.0” अब देश के अन्य राज्यों के लिए भी सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित सेवाओं का प्रेरक मॉडल बन रही है।