समाज के रोल माडल: सायकल वाले कमिश्नर रिजवानउददीन

(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। ग्वालियर में पीएफ कमिश्नर रहे रिजवानउददीन आज अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुये पेट्रोल-डीजल संकट में आम क्या सभी देशवासियों के लिये एक आदर्श साबित हुये है। वह आज भी दिल्ली में रीजनल कमिश्नर नेशनल अकादमी पीएफ के पद पर होने के बाद भी प्रतिदिन 17 किलोमीटर सायकल चलाकर आफिस पहुंचते है और वापसी में भी जनकपुरी अपने आफिस से किदवई नगर तक 17 किलोमीटर सायकल चलाकर घर पहुंचते है। लोग अब उन्हें सायकल वाले कमिश्नर के नाम से जानने लगे है। 
ग्वालियर सहित जम्मू काश्मीर व लद्दाख के पीएफ कमिश्नर रहे रिजवानउददीन नवाचार के लिये जाने जाते है। वह पीएफ कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद पर होने के बाद 2012 से लगातार सायकल चला रहे है, वह ग्वालियर से आगरा, दिल्ली, शिवपुरी तक भी सायकल से जाते थे, यहां तक कि जम्मू में भी वह आम आदमी की तरह सायकल का ही आने जाने में उपयोग करते थे। सही बात यह है कि जब प्रधानमंत्री सहित हर प्रमुख व्यक्ति ईंधन संकट को लेकर आम लोगों से ईंधन बचाने की बात व पब्लिक वाहन सहित सायकल के उपयोग की बात कर रहे है, तो दिल्ली के पीएफ कमिश्नर रिजवानउददीन आम लोगों के लिये एक प्रेरणा बन गये है। उनके कार्यालय में उनके अधीनस्थ से लेकर उनसे मिलने आने वाले लोग भी इस अनूठी पहल से प्रभावित है और स्वयं भी सायकल चलाने का उन्हें विश्वास दिलाते हैं।
ईंधन संकट व प्रदूषण चिंता का विषय
पीएफ की नेशनल अकादमी के पीएफ कमिश्नर रिजवानउददीन का इस संदर्भ में कहना है कि वर्तमान संकट में हमे प्रधानमंत्री जी की अपील को ध्यान में रखते हुये ज्यादा से ज्यादा पब्लिक वाहन शेयरिंग में यूज करने चाहिये और मौका लगे तो सायकल का भी अधिकाधिक उपयोग करना चाहिये। रिजवानउददीन ने कहा कि सायकल फिटनेस का सबसे बेहतरीन साधन है, इसे हम नियमित रूप से अपनाकर अपने गंतव्य तक जाये। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, वहीं हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा। 

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