बच्चों को गौआधारित जीवन-पद्धति से करा रहे हैं परिचित
ग्वालियर। वर्तमान में जहाँ ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, वहीं प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल छोटे बच्चों का आदर्श गौशाला में उत्साहपूर्वक आगमन हो रहा है। बच्चों की विविध जिज्ञासाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रकृति, प्रवृत्ति, भारतीय संस्कृति एवं गौआधारित जीवन-पद्धति से परिचित कराया जा रहा है। साथ ही गौशाला परिसर में बच्चों को मोरिंगा (सहजन) के सीड बॉल्स बनाना भी सिखाया जा रहा है, जिससे उनमें पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं प्रकृति संरक्षण के संस्कार विकसित हों।
इसी क्रम में गत वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 9 जून से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास में एक सप्ताह का “बाल संस्कार सप्ताह” आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में अहमदाबाद की सी.आर. यूनिवर्सिटी के शोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित प्रयोगों को बच्चों के खेल, खिलौने, आहार, गीत एवं विज्ञान की समझ के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। यह आयोजन बच्चों में संस्कार, प्रकृति प्रेम, सामाजिक चेतना एवं भारतीय जीवन मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध होगा। साथ ही बच्चों में उत्कृष्ट अध्ययन, वैश्विक सोच एवं स्वाभिमान के साथ भारत को अपनी कर्मभूमि बनाने की प्रेरणा भी विकसित करेगा, ताकि वे भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों से जुड़े रहकर राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।