मांगलिक रस्में, नेग चलन को लिपिबद्ध करेगा अग्रवाल संगठन, अनूठी पहल

(विनय अग्रवाल)
ग्वालियर। क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय रीति रिवाज, रस्में, परंपराओं से नई पीढ़ी कैसे अवगत हो, कम्प्यूटर, मोबाइल और एआई के युग में युवा पीढ़ी इन रीति रिवाजों, परंपराओं रस्मों से दूर होती जा रही हैं, उन्हें पता ही नहीं है कि कौन सी पूजा करें, कब कौन सा व्रत रखे, जन्म व विवाह के समय कैसे रस्में निभायें।
लेकिन अब इन सबकी चिंता अग्रवाल समाज के एक व्यक्ति ने की हैं। यह व्यक्ति है अ.भा. अग्रवाल संगठन की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल। राकेश अग्रवाल चेंबर आफ कामर्स के भी उपाध्यक्ष है। उनका इस संदर्भ में कहना है कि जब उन्होंने अपने पारिवारिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न रिश्तेदारों व मित्रों के यहां आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों, शादी विवाह, दस्टौन व अन्य कार्यक्रमों में देखा कि नई पीढ़ी के लड़के लड़कियों को समाज की नई पीढ़ी के लड़के लड़कियों को समाज की विवाह पद्धति, नेग चलन व अन्य समय समय पर होने वाली रस्मों व पूजापाठ की जानकारी ही नहीं है, तो उन्हें इसका विचार आया और इसमे पहल करने की सोची। 
चेंबर आफ कामर्स के उपाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने बताया कि पहले अग्रवाल समाज के  से मांगलिक आयोजनों में 7 से 15-15 दिन तक विभिन्न रस्में होती थी, लेकिन अब यह मांगलिक आयोजन केवल जयमाला, बारात, दावत व फेरे में ही सिमटकर रह गये है, जिस कारण अब रिश्तेदार भी शादी विवाह में कुछ देर ही आ पाते हैं। राकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में काफी शोध, अध्ययन करके अग्रवाल समाज की अग्रवंश परिणय संस्कार पुस्तिका का प्रकाशन करने का निर्णय लिया है। इसी संदर्भ में रविवार 7 जून को अग्रवाल समाज की रीति रिवाज, रस्मों और नेग चलन पर कार्यशाला भी आयोजित की जायेगी। 

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