काव्यधारा मंच ने मदर डे पर काव्य संध्या आयोजित की मातृ शक्ति का स्वागत
ग्वालियर मध्य प्रदेश काव्य धारा मंच की भव्य काव्य संध्या संपन्न, महिला शक्ति का हुआ स्वागत
ग्वालियर।
मध्य प्रदेश काव्यधारा मंच के तत्वावधान में मदर्स डे के पावन अवसर पर 406, सृष्टि अपार्टमेंट, फूलबाग चौराहा के सामने स्थित श्री यासीन खान मंसूरी के निवास स्थल पर आयोजित भव्य काव्य संध्या ये गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम में साहित्य, समाजसेवा एवं संस्कृति जगत से जुड़े अनेक गणमान्यजन, कवि एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिथि-विजय सेठी अकेला
मुख्य अतिथ
अशोक प्रेमी
विशिष्ट अथति रविन्द्र रवि
कार्यक्रम संचालन अमित चितवन ने कियां
स्वागत संस्था अध्यक्ष नयन किशोर श्रीवास्तव ने किया
कार्यक्रम के दौरान महिला शक्ति का पुष्पमाला एवं अभिनंदन के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर कवियों एवं साहित्यकारों ने माँ की ममता, त्याग, संस्कार एवं जीवन मूल्यों पर आधारित भावपूर्ण रचनाओं का काव्य पाठ कर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के आयोजक एवं संयोजक नयन किशोर श्रीवास्तव ने सभी आगंतुक अतिथियों, कवियों एवं साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के उपरांत उपस्थित जनों के लिए स्वादिष्ट सुल्पाहार की भी व्यवस्था की गई।
अंत में उपस्थित अतिथियों ने ऐसे सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए मंच की सराहना की।
कविताएं कवियों ने कुछ इस प्रकार पड़ी
जिसकी ममता छांव तले हर दुख छोटा लगता था
जिसके रहते सूना आंगन भी मेला सा लगता था।
उंगली पकड़ पकड़ कर चलना हमें सिखाया था
अपने मुंह का कर निकाल कर उसने हमें खिलाया था
-नयनकिशोर श्रीवास्तव
हर इक दर्द की दवा लगती है माँ,
सूखी रोटी में भी दुआ लगती है माँ.
मेरी ख़ामोशियों को पढ़ लेती है,
दिल की गहरी सी सदा लगती है मां.
-यासीन मंसूरी
दृश्य सभी देश के मैं देखनें को चल पड़ी
प्रचंड अग्नि ज्वाल सी मचल पड़ी मचल पड़ी
एक कर में ध्वजा थी शक्ति का प्रमान थी
एक कर में था ग्रंथ ज्ञान का विधान थी
-अनुभवी शर्मा
मांँ अब किसके आंँचल में मैं छुपकर रो पाऊंगी
मांँ अब तेरे गले से लगकर मैं कैसे हर्षाऊंगी
-श्वेता गर्ग "स्वाति "
मां ही सृष्टि मां ही ईश्वर,
मां बसते सब देवेश्वर।
मां ने यदि आशीष दिया तो,
काट नहीं सकते नागेश्वर।-
-जगमोहन श्रीवास्तव
नादान था न जानता मैं शेरो-शायरी।
मां की दुआओं ने मुझे काबिल बना दिया।।
ये
-रवि कांत श्रीवास्तव 'दबंग'
उसके लब पे हरदम दुआ रहती है,
एक मां है जो कभी न ख़फ़ा रहती है।
बीत जाती हैं कई रातें जगते हुए,
फिर भी उसकी सांसों में हवा रहती है।
-विजय सेठी अकेला
जब मां की पीड़ा बढ़ती है,तो शब्द मौन हो जाते हैं।
रस,छंद सभी अरु अलंकार, भयग्रस्त हुए सो जाते हैं।
-रामसेवक शाक्यवार
जिसको मां से प्यार नहीं है
जीने का हक़दार नहीं है ,
-अमित चितवन
मातृ दिवश पर यह थही वे करते हैं मां को याद।
बाक़ी दिन मां की ममता का नहीं लेते स्वाद।।
-अशोक, प्रेमी,
दिल भी उदास है आंखें उदास हैं
मेरे बिन तुम्हारी जुल्फें उदास हैं
~ सुयश श्रीवास्तव
सारी दुनियाँ धूप घनी है छाँव की राहत मेरी माँ |
द्वेष भरा है ये जग सारा प्रेम की सूरत मेरी माँ - विकास बघेल
घर का कमरा याद करें वो
तेरे क़दमों की आहट
मुझको हरदम ख़लती है वो
तेरी आँखों की चाहत-
-अंजली चौरसिया
मातृ दिवश पर ही वे करते हैं मां को याद।
बाक़ी दिन मां की ममता का नहीं लेते स्वाद।।
अशोक, प्रेमी,
नौकर चाकर नहीं चाहिए
चाह नहीं धन दौलत की है,
जितना समय दिया है तुमको,
उसमें से कुछ लौटा दो
-कुलदीप सिंह सेंगर