प्रेम सम्पूर्ण वेदों का सारः पंडित शास्त्री
ग्वालियर। आचार्य श्रीजी पीठ सुधर्म सभा के तत्वाधान मे संगीतमय श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का आयोजन गुढ़ी पाएगा स्थित संजय स्मृति उच्च माध्य विद्यालय प्रांगण में कथाव्यास आचार्य पंडित राजीव शास्त्री महाराज के मुखारबिंद से भागवत के प्रथम दिन कहा कि कलयुग में लोक में जीव में आसुरी स्वभाव बन चुका है। यह स्वभाव अधर्म की ओर अग्रसर है। कलयुग के प्रभाव से लोगों की बुद्धि खराब हो गई है। भागवत कोई पुस्तक या पोथी नहीँ साक्षात कृष्ण है।
आचार्य ने बताया कि नैमिशारणय भूमि कथा स्थली, काशी ज्ञान भूमि, वृन्दावन भूमि प्रेम रस भूमि और अयोध्या त्याग की भूमि कहा गया। कथा को सामान्य जन बनकर सुनना चाहिए। शास्त्री जी ने कहा कि स्वर्ग से मणि, कामधेनु गाय, कल्पवृक्ष मिल जाये। ये जीवन में भौतिक सुख प्राप्त करा सकते है, लेकिन मौक्ष नहीं दिला सकते। प्रेम सम्पूर्ण वेदों का सार है। व्यक्ति का पुण्य जब एकत्रित हो जाता है उसे कथा रूपी कथा फल, कल्पवृक्ष प्राप्त हो जाते है। संसार में मन ही कर्ता धर्ता है। मन की शुद्धि के बिना कोई कार्य सफल नहीं हो सकता। कथा की आरती रविकांत दुबे व उनकी पत्नी स्मिता ने की। कथा स्थल पर अनेक श्रोतागणों ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लिया। कथा के दूसरे दिन सोमवार को दोपहर एक बजे गौ करण धुंधकारी एवं ध्रुव चरित की कथा श्रवण कराएंगे।