ग्वालियर। एग्रीविजन के द्वितीय क्षेत्रीय सम्मेलन का समापन प्रेरणादायी संदेशों के साथ हुआ, जहां विशेषज्ञों ने युवाओं को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं विद्यार्थी कल्याण न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एग्रीविजन के द्वितीय क्षेत्रीय सम्मेलन का समापन समारोह उत्साह और प्रेरणा से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन के मूल सिद्धांतों से अवगत कराते हुए कहा कि ईश्वर से नौकरी नहीं, बल्कि बल, बुद्धि और विद्या की कामना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसके पास ये तीनों गुण होते हैं, उसे सफलता स्वयं प्राप्त हो जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ल ने सफलता की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकास और प्रगति को सफलता नहीं समझना चाहिए। विकास संसाधनों और कौशल की वृद्धि है, जबकि प्रगति लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रक्रिया है, लेकिन सफलता वह स्थिति है, जहां हम अपने उद्देश्यों को पूर्ण रूप से प्राप्त करते हैं।
कार्यक्रम के आयोजक डॉ. संजय शर्मा ने सम्मेलन की दो दिवसीय गतिविधियों की जानकारी दी। पहले सत्र में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री चेतस सुखाड़िया ने “वंदे मातरम” के महत्व को बताते हुए कहा कि यह केवल शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है, जिसने हमें आजादी की लड़ाई में शक्ति और एकता प्रदान की। वहीं दूसरे सत्र में रोल मॉडल के रूप में आए उद्यमियों ने कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने के अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का संचालन महक जैन द्वारा किया गया।