दिव्यांगजनों को स्वावलंबन से जोड़ने पर जोर, अवाड़पुरा में जागरूकता शिविर आयोजित
ग्वालियर। दिव्यांगजनों को शासन की योजनाओं, पुनर्वास सेवाओं और कौशल विकास से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को अवाड़पुरा स्थित शासकीय हाईस्कूल में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, ग्वालियर द्वारा दिव्यांग जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में दिव्यांगजनों और उनके परिजनों को विभिन्न शासकीय योजनाओं, यूडीआईडी कार्ड, थेरेपी, कृत्रिम अंग सहायता तथा पुनर्वास सेवाओं की जानकारी देकर लाभान्वित किया गया।
रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव नवल किशोर शुक्ला ने कहा कि दिव्यांगजनों के प्रति केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि उन्हें सक्षम, समर्थ और स्वावलंबी बनाने की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने दिव्यांगजनों को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।उन्होंने केंद्र में उपलब्ध थेरेपी, परामर्श, कृत्रिम अंग सहायता और प्रत्येक बुधवार को यूडीआईडी प्रमाणपत्र निर्माण की सुविधा की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक शासन की योजनाओं की जानकारी पहुंचाकर उन्हें लाभ दिलाना महत्वपूर्ण है। साथ ही सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसे शिविरों में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया जा सके। कार्यक्रम में केंद्र के सचिव पी.के. शर्मा ने शिविर के उद्देश्य और केंद्र की गतिविधियों की जानकारी दी। केंद्र के प्रशासनिक अधिकारी गिरीश कुमार पाल ने शासन की योजनाओं तथा दिव्यांगजन किस प्रकार केंद्र की सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी। शिविर में शासकीय हाईस्कूल की प्राचार्य श्रीमती दीपिका शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लश्कर जिला सेवा प्रमुख चितवन सोनी, संचालन समिति सदस्य रमाशंकर शर्मा, प्रमोद कुमार गुप्ता, सूर्यकांत अग्निहोत्री, रेडक्रॉस के शराफत अली खान सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत एवं आभार रमाशंकर शर्मा ने व्यक्त किया। शिविर में एक सैकड़ा से अधिक दिव्यांगजन, उनके अभिभावक तथा विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लेकर योजनाओं और सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोजन को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और पुनर्वास की दिशा में उपयोगी पहल माना गया।