शिक्षा नगर स्मार्ट स्कूल ने पेश की मध्य प्रदेश में उत्कृष्ट शैक्षणिक मॉडल की मिसाल: स्मार्ट सिटी सीईओ टी. प्रतीक राव
- पुनरुद्धार के बाद छात्र संख्या 541 से बढ़कर पहुंची 1067 के पार, डिजिटल शिक्षा और नए संकायों से सरकारी स्कूलों को मिली नई दिशा
ग्वालियर। आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्यावरण संतुलन के संकल्प को साकार करते हुए ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा शिक्षा नगर स्थित पूर्ववर्ती शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का कायाकल्प कर इसे अत्याधुनिक 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में पुनर्विकसित किया गया है, जो आज पूरे मध्य प्रदेश में एक अनुकरणीय नजीर बन चुका है। यह अत्याधुनिक परिसर न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल युग के अनुरूप तैयार कर रहा है, बल्कि शासकीय विद्यालयों के प्रति आमजन की धारणा को भी बदल रहा है। इस कायाकल्प का सीधा प्रभाव विद्यालय में छात्र नामांकन पर पड़ा है, जहां छात्र संख्या पहले की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है।
नगर निगम के अपर आयुक्त एवं ग्वालियर स्मार्ट सिटी सीईओ टी. प्रतीक राव ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना का मूल उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और नई पीढ़ी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पहले जहां इस परिसर में सुविधाएं सीमित थीं और छात्र संख्या लगभग 541 तक सिमटी हुई थी, वहीं अब नए और सर्वसुविधायुक्त कैंपस के निर्माण के बाद यह संख्या बढ़कर 1067 के पार पहुंच चुकी है। यह वृद्धि शासकीय शिक्षा प्रणाली और स्मार्ट सिटी द्वारा उपलब्ध कराई गई गुणवत्ता पर अभिभावकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। सीईओ राव ने बताया कि विद्यालय के प्राचार्य अशोक कुमार दीक्षित सहित पूरे शैक्षणिक स्टाफ के कुशल प्रबंधन से यहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक को-एजुकेशन व्यवस्था के तहत हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और भविष्य को देखते हुए एग्रीकल्चर और फिजिकल एजुकेशन जैसे नए संकायों की भी शुरुआत की गई है।
सीईओ राव ने बताया कि इस विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण अनुकूल स्वरूप है। सभी कक्षाओं को इंटरएक्टिव स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक ऑडियो-विजुअल टूल्स से सुसज्जित किया गया है, जिससे विद्यार्थी जटिल विषयों को भी आसानी से समझ पा रहे हैं। निर्माण के दौरान परिसर में मौजूद 50 से अधिक पुराने घने वृक्षों को काटे बिना, ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के तहत मुख्य भवन संरचना में सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर में सीसीटीवी नेटवर्क, आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम, नई ड्रेनेज व्यवस्था और शुद्ध आरओ पेयजल के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। श्री राव ने विश्वास जताया कि शिक्षा, तकनीक और पर्यावरण का यह समन्वित मॉडल मध्य प्रदेश के अन्य शासकीय विद्यालयों के लिए भी एक मार्गदर्शक साबित होगा।