पानी बचा, खेती संवरी और आमदनी दोगुनी हुई

(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर कभी पानी की कमी के कारण चंद्रभान की खेती मुश्किलों से घिरी रहती थी। अच्छी फसल की आस में कई बार परिवार की उम्मीदें भी सूख जाती थीं। लेकिन प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “खेत तालाब योजना” ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है।
जिले के विकासखंड भितरवार की ग्राम पंचायत बामरोल निवासी चंद्रभान सिंह रावत के खेतों में कुछ वर्ष पहले तक सिंचाई का कोई स्थायी साधन नहीं था। खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। बारिश कम होने पर फसलें प्रभावित होती थीं और पशुओं के लिए भी पानी जुटाना चुनौती बन जाता था। मेहनत भरपूर होती थी, लेकिन उसका अपेक्षित फल नहीं मिल पाता था।  किसान चंद्रभान की किस्मत बदलने की शुरूआत तब हुई जब उन्हें “खेत तालाब योजना” के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इस योजना के तहत अपने खेत पर तालाब का निर्माण कराया। ग्राम पंचायत के सहयोग और स्वयं चंद्रभान सिंह रावत की सक्रिय भागीदारी से यह कार्य पूरा हुआ। मनरेगा के तहत लगभग 1.79 लाख रुपए की लागत से यह तालाब बनकर तैयार हुआ है। तालाब निर्माण में चंद्रभान ने स्वयं काम किया, जिसका उन्हें मेहनताना भी मिला। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।  
अब यही तालाब चंद्रभान की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। वर्षा का पानी खेत तालाब में सुरक्षित रहता है और पूरे साल सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता है। इस तालाब से चंद्रभान के खेतों की सिंचाई के साथ-साथ आसपास के लगभग आधा दर्जन अन्य किसान परिवारों के मवेशियों को भी पीने के लिये पानी मिल रहा है। इस बदलाव का असर उनकी खेती पर साफ दिखाई देता है। अब वे एक के बजाय दो-दो फसलें ले रहे हैं। साथ ही फसल उत्पादन भी बढ़ गया है। खेती से उनकी आय लगभग दोगुनी हो गई है।

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