बड़ी शाला के शहीद हुए 745 संतो को नहीं भुलाया जा सकता : अखाड़ा परिषद के श्री महंतो ने कहा



सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला में चल रहे इस अलौकिक श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आज तीसरा दिन है। यह संपूर्ण भव्य और दिव्य कार्यक्रम जगतगुरु द्वारा आचार्य श्री पूर्ण वैराठी पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामसेवक दास जी महाराज की पावन अध्यक्षता, गरिमा और दिव्य संरक्षण में अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हो रहा है।
1857 की क्रांति में महारानी लक्ष्मीबाई जी और राष्ट्र की रक्षा करते-करते वीरगति को प्राप्त हुए पीठ के 745 शहीद नागा साधुओं की पावन स्मृति में आयोजित यह यज्ञ महाराज श्री (स्वामी श्री रामसेवक दास जी) की दिव्य सोच और पितृ-तर्पण की एक अद्भुत मिसाल है। आज तृतीय दिवस की कथा में श्रोताओं ने परम पूज्य आचार्य श्री रामचरण दास जी महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित भागवत गंगा में डुबकी लगाई। आचार्य श्री की ओजस्वी और रसमयी वाणी ने पंडाल में उपस्थित भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
2. मुख्य परीक्षित स्वर्गीय श्री कृष्णलाल कटारे श्री मती रामसुखी कटारे
  स्वर्गीय श्री द्वारका प्रसाद कटारे श्रीमती रामकली कटारे श्री रामकुमार कटारे श्रीमती गीता कटारे एवं उनके समस्त कटारे परिवार ने भी व्यासपीठ और भागवत भगवान का सविधि पूजन-अर्चन किया और कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया। परीक्षित के रूप में पूरे कटारे परिवार की यह सेवा और भक्ति इस आयोजन की दिव्यता को और बढ़ा रही है।
3. मुख्य प्रसंग: कपिल देवहूति संवाद और सांख्य शास्त्र
पूज्य आचार्य श्री रामचरण दास जी महाराज ने कथा के प्रथम सत्र में भगवान विष्णु के पंचम अवतार भगवान कपिल के प्राकट्य और उनके द्वारा माता देवहूति को दिए गए सांख्य योग के उपदेश का अत्यंत मार्मिक विवेचन किया।
 मन की गति और भक्ति का मार्ग: आचार्य श्री ने समझाया कि मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है। जब मन संसार में भटकता है तो दुख मिलता है, और जब यही मन भगवान के चरणों में समर्पित हो जाता है, तो परम आनंद की प्राप्ति होती है।
 संतों की महिमा का साक्षात् दर्शन: पूज्य आचार्य श्री ने संतों के लक्षणों का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा संत वही है जो दूसरों के कल्याण के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दे। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस सिद्धपीठ के 745 शहीद संतों का जीवन साक्षात् उसी उच्च कोटि के संतत्व का प्रमाण था, जिन्होंने शरणागत और राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।
4. सती चरित्र एवं ध्रुव चरित्र (दृढ़ संकल्प की गाथा)
कथा के उत्तरार्ध में आचार्य श्री रामचरण दास जी ने माता सती के त्याग और परम भक्त ध्रुव की कथा का दिव्य रसपान कराया।
 अटल ध्रुव चरित्र: मात्र 5 वर्ष की अल्पायु में बालक ध्रुव ने माता सुरुचि के कटु वचनों से प्रेरित होकर वन का मार्ग लिया और गुरुदेव नारद के बताए महामंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) के अखंड जाप से छह महीने में भगवान नारायण को प्रकट कर लिया।
 संदेश: आचार्य जी ने बताया कि जैसे बालक ध्रुव के दृढ़ संकल्प के सामने भगवान को भी पिघलना पड़ा, वैसे ही बड़ी शाला के संतों का संकल्प भी देश की स्वतंत्रता के लिए अडिग था।
5. जड़ भरत चरित्र और रहूगण संवाद
तृतीय दिवस की कथा में आचार्य श्री ने जड़ भरत जी के चरित्र के माध्यम से यह समझाया कि जीव को किसी भी सांसारिक वस्तु या प्राणी में अत्यधिक आसक्ति नहीं रखनी चाहिए। जड़ भरत जी द्वारा राजा रहूगण को दिया गया उपदेश आत्मज्ञान की पराकाष्ठा है, जो यह सिद्ध करता है कि संतों के चरणों की धूलि के बिना सच्चा ज्ञान और वैराग्य संभव नहीं है।
आयोजन की दिव्यता और पीठाधीश्वर महाराज श्री का गौरव
यह संपूर्ण अनुष्ठान पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामसेवक दास जी महाराज की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक और दिव्य रूप ले चुका है। व्यासपीठ से पूज्य आचार्य श्री रामचरण दास जी ने भी महाराज श्री के इस पुनीत प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की, जो अपने पूर्वज शहीद संतों की स्मृति को इस प्रकार भागवत ज्ञान यज्ञ के माध्यम से जीवंत रख रहे हैं। यह दिव्य आयोजन ग्वालियर ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सनातन और देशभक्ति चेतना को जाग्रत कर रहा है।
महंत श्री रामस्वरूप दास महाराज ( पंच तेरह भाई
 अखाड़ा परिषद महंत)
महंत श्री सुंदर दास जी (अध्यक्ष झाड़ियां निर्मोही अखाड़ा परिषद)
श्री हरिशंकर दास जी (अध्यक्ष ब्रज अखाड़ा परिषद)
संतों के ओजस्वी वचन:
पीठ पर विराजमान पूज्य संतों ने एक स्वर में कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई के पावन शरीर की रक्षा के लिए संतों द्वारा दिया गया यह बलिदान एक ऐसा अलौकिक इतिहास है, जिसकी उपमा पूरे विश्व में कहीं और नहीं मिलती। भारत की स्वतंत्रता की पूर्णाहुति और इस महासंग्राम का वह गौरवमयी समापन इसी सिद्धपीठ बड़ी शाला की भूमि पर हुआ, जहाँ संतों के रक्त से राष्ट्रभक्ति की नई परिभाषा लिखी गई। यह भूमि केवल एक पीठ नहीं, बल्कि देश की स्वाधीनता और सनातन अस्मिता का साक्षात तीर्थ है।
तृतीय दिवस)
कथा के विश्राम पर मुख्य यजमान
 एवं समस्त कटारे परिवार महाराज की व्यासपीठ की महाआरती की
। इसके पश्चात् सिद्धपीठ के उन 745 अमर शहीद नागा संतों के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की गई और देश की सुख-समृद्धि की कामना के साथ महाप्रसाद का वितरण हुआ।
पीठ का गौरव वाक्य:
"जगतगुरु द्वारा आचार्य श्री पूर्ण वैराठी पीठ (सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला, लक्ष्मीबाई कॉलोनी, ग्वालियर) का ७०० वर्षों का इतिहास वैराग्य और राष्ट्र की संप्रभुता के लिए प्राण न्योछावर करने वाले हुतात्माओं का अमर तीर्थ है, जो आज पूज्य पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामसेवक दास जी महाराज के नेतृत्व में निरंतर आलोकित हो रहा है।"

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