भक्ति और ज्ञान के योग से मिलती भगवत कृपा शास्त्री

जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का छंठवा दिन 

ग्वालियर। जिस प्रकार वस्त्र साफ करने के लिए पानी और साबुन दोनों की आवश्यकता होती है, इसी प्रकार भगवतकृपा पाने के लिए भक्ति और ज्ञान दोनों का समावेश होना जरूरी है। यह विचार शनिवार को पुरानी छावनी के समीप जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के छंठवे दिन कथा व्यास पं सुरेश शास्त्री ने व्यक्त किए।
उन्होंने महारास के बारे में बताते हुए कहा कि जीव और परमात्मा का मिलन ही महारास है। अपनी सुध-बुध खोकर जब हम परमात्म में लीन हो जाते हैं। परमात्मा को पाने का यह वास्तविक स्वरूप महारास कहलाता है। कंस वध की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब उसने मासूम बच्चों को मारा तो कृष्ण ने तय कर लिया कि इसका वध जरूरी है। उन्हें सिस्टम को ठीक करने में सवा सौ वर्ष लगे। इससे पहले अंवतिका के गुरूकुल में सांदीपनि ऋषि के सानिध्य 
में रहकर उन्होंने 65 दिन शिक्षा ग्रहण की। गोपी उद्धव प्रसंग के माध्यम से उन्होंने द्वेत और अद्वेत के बारे में बताते हुए कहा कि भगवान और भक्त अलग नहीं हैं। निराकार ही साकार है। उन्होंने कहा कि कलयुग मेें संगठन की शक्ति को सर्वोपरि बताया गया है, इसलिए सभी सनातनी एक रहें, जिससे दूसरे लोग सनातन की ओर आंख उठाकर न देख सकें।
भगवान बनने की कोशिश मत करो....
खुद को भगवान बताकर आरती कराने वालों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो खुद की आरती कराते थे, वो जेल में पहुंच गए और भगवान जेल में पैदा हुई, तो भी उन्हें जेल की सलाखें रोक नहीं सकीं, इसलिए भगवान बनने की कोशिश मत करो। इस मौके पर जीडीए अध्यक्ष मधुसुदन भदौरिया, पूर्व विधायक मुन्नासिंह भदौरिया, शैलेंद्र बरुआ, पूर्व निगम अधिकारी सतपाल सिंह चौहान, पूर्व पार्षद जगदीश पटेल, अवधेश नायक, जयराम पचौरी, सचिन पचौरी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। व्यासपीठ की आरती कथा परीक्षत सरोज प्रेम पचौरी ने की।

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