स्पीड ब्रेकर बने आम जनों की मुसीबत
(रवि कांत दुबे )
ग्वालियर । शहरवासियो को सड़को पर हो रहे गढ़ढो से जहां विभाग अभी मुक्ति नहीँ दिला पाया है, वही दूसरी ओर अब सड़को पर बिना माप दंड के गैर जिम्मेदारी रवैया के चलते लगाए जा रहे स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए यातायात मे बाधा बने हुये है।

ज्ञातव्य है कि शहर के स्कूल, महाविद्यालय, अस्पताल, होटल , रिहायशी इलाका टी टर्न पॉइंट,गली, सीधे रोड के आसपास कोई मार्ग क्रॉस कर रहा हो वहाँ स्पीड ब्रेकर लगाए जाने का नियम है। साथ मे कुछ दूरी पहले सफेद जेबरा लाइन और रेडियम भी लगाने जरूरी है जिससे चालक इन को देख कर अपने वाहन की गति कम कर ले। अब शहर की हर सड़क पर बिना माप दंड के रात के अँधेरे मे स्पीड ब्रेकर पांच, तीन, दो लाइन स्ट्रिप के प्लास्टिक के लगा दिए गये है। इतना ही नहीं कई सड़कांे पर ब्रेकरो की दूरी आधे किलोमीटर से भी कम है,बिना माप दंड के लगे ब्रेकरो से कोई भी दो पहिया वाहन पर पीछे बैठी महिला, वृद्ध जन, बच्चा कभी भी इन ब्रेकरो पर से वाहन गुजरते वक्त गिरने का भय बना रहता है! यहाँ तक पीछे बैठी गर्भवती महिला, एम्बुलेंस मे ले जा रहे मरीज को शारीरिक हानि होजाती है। पांच, तीन, दो लाइन वाले ब्रेकर से अधिकांश वाहन के नट बोल्ट भी ढीले पड़ रहे है !बार बार ब्रेक लगाने से पेट्रोल, डीजल की खप्त ज्यादा हो रही है । दिन भर मे इन ब्रेकरो पर से गुजरने वाले टम टम तो पलट ही जाते है और इसके कारण सवारी चोटिल हो रही है। रेडियम नहीं लगे होने से इन ब्रेकरो पर से रात को गुजरने वाले वाहन को सबसे ज्यादा परेशानी होती है जब उन्हें अचानक ब्रेक लगा कर गति धीमी करनी पड़ती है। वाहन मे रखा सामान या सवारी के पूरा शरीर हिल जाते है।
इन ब्रेकरो से आम जनता सहित अधिकारी वर्ग भी पीड़ा दायक ब्रेकरो से गुजर कर कमर, कंधे, पेट दर्द आदि का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़को पर लगे स्पीड ब्रेकर से जब डोर टू डोर से कचरा एकत्र कर कचरा गाड़ी गुजरती हे तों कचरा उछल कर सड़क पर बिखर जाता है इससे स्वच्छ ग्वालियर अभियान को पलीता लग रहा है। ग्वालियर शहर मध्यप्रदेश का ऐसा शहर हे जहाँ सबसे ज्यादा सड़को पर स्पीड ब्रेकर बहुत कम दूरी पर बनाये गये है।