शिव समान दुनिया में कोई सामर्थ्यवान नहीं : अविरल कृष्ण

ग्वालियर हनुमंत मण्डल सेवा समिति द्वारा आयोजित शिवमहापुराण के सप्तम दिवस कथा में कि भगवान शिव अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मनुष्य की पुकार ऐसी हो जो हृदय से निकले दुःखी की पहचान है।सह हृदय से रोते रोते मुर्क्षित हो कर समाधिस्थ हो जाता है। हृदय की पुकार में इतनी शक्ति होती है। भगवान का सिंघासन भी डोल जाता है।
भगवान जो भी करता है।हमै समझना चाहिए इसी में हमारा हित है।इसको ऐसे समझें छोटा-सा बच्चा घर में जल रहें दीपक की ओर हाथ फैलाता है। तो मां दौड़ कर हाथ हटा देती है। उसे पता है।हाथ जल जायेगा बच्चा अनजान होता है। इसी प्रकार भक्त की प्रार्थना पर। कार्य नहीं बना तो समझना चाहिए भगवान जो करेंगे उस में हमारा हित होगा। हम पूज करते हैं पर मन में संसार रखते। सम्पूर्ण समर्पण भाव से ईश्वर को भेजना चाहिए है असुरों से प्रेरणा लेनी चाहिए बड़े बड़े असूरों ने शिव की नियम पूर्वक कठोर तपस्या की भगवान स्वयं उनके सम्मुख प्रकट हो कर वरदान दिया बलशाली हो कर शास्ञ विरूद्ध कार्य करने पर दण्ड‌ भी दिया।है अपने आराध्य के प्रति समर्पण भाव से भक्ति करानी चाहिए।
शास्ञौ में लिखा है। गुरु पंडित,मात, स्वामी की वाणी बिना विचार करें शुभ जानी। कल कथा का विराम दिवस है। तथा कथा का समय ४ बजे से ७ बजे तक रहेगा।समय का विशेष ध्यान रखें। महाराज श्री का स्वागत गोकुल बंसल मनीष अग्रवाल, श्याम बंसल, वीरेंद्र गुप्ता, संतोष अग्रवाल, प्रदीप मितल रामबाबू अग्रवाल आदि ने किया

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