अंतर्निहित दिव्यता के जागरण हेतु समर्पित एक और जीवंत आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नारायणा विहार, नई दिल्ली में डीजेजेएस की नई शाखा का उद्घाटन समारोह का भव्य आयोजन

ब्रह्मज्ञान के शाश्वत विज्ञान के माध्यम से वैश्विक शांति स्थापना हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाते हुए, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा नई दिल्ली के नारायणा विहार में एक नए आश्रम का शुभ उद्घाटन किया गया। यह नवीन केंद्र A-53, नारायणा विहार, नई दिल्ली-110028 में स्थापित किया गया है। 

इस भव्य उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा इस शुभ अवसर को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की कृपा एवं आशीर्वाद से कार्यक्रम का शुभारम्भ पावन वैदिक हवन यज्ञ के साथ हुआ। वैदिक मंत्रों की गूंजती ध्वनियों के मध्य संपन्न हुए इस आध्यात्मिक अनुष्ठान ने सम्पूर्ण वातावरण को पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक तरंगों से भर दिया। भावपूर्ण भक्तिमय प्रस्तुतियों ने समारोह को और अधिक दिव्य बनाया। जिससे उपस्थित श्रद्धालु भक्ति की गहराइयों में निमग्न हो गए तथा उनके हृदय एवं मन परमात्मा की ओर उन्मुख हुए।
सभा को संबोधित करते हुए, डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने शास्त्रों की सनातन ज्ञानधारा को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव जीवन का परम उद्देश्य केवल संसारिक उपलब्धियों, भौतिक संपदा, सामाजिक प्रतिष्ठा या संबंधों तक सीमित नहीं है। जीवन का वास्तविक लक्ष्य है- ईश्वर साक्षात्कार, अर्थात् परम दिव्यता से पूर्ण योग। यह परम लक्ष्य केवल युग के पूर्ण सतगुरु की कृपा द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, जो ब्रह्मज्ञान रूपी शाश्वत व सनातन दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं। यह दिव्य ज्ञान साधक को अपने अंतर्जगत में परमात्मा का प्रत्यक्ष अनुभव कराता है और उसे ध्यान की आंतरिक यात्रा पर अग्रसर करता है। पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन में नियमित साधना के माध्यम से साधक धीरे-धीरे संसारिक भ्रमों से पार हो अपनी अंतर्चेतना का जागरण करता है, स्थायी शांति और तृप्ति का अनुभव करता है तथा अंततोगत्वा जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर अग्रसर होता है। भौतिक जगत में रहते हुए भी, वास्तविक आश्रय और स्थायी शांति केवल ब्रह्मज्ञान पर आधारित ध्यान साधना के द्वारा अंतर्मुख होकर ही प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी, वर्तमान युग के पूर्ण सतगुरु के रूप में, असंख्य जिज्ञासुओं को ब्रह्मज्ञान की दीक्षा देकर उन्हें जीवन के उच्च उद्देश्य से पुन: जोड़ रहे हैं। साथ ही, उन्हें एक ऐसा व्यावहारिक आध्यात्मिक साधन प्रदान कर रहे हैं, जो न केवल उनके आंतरिक विकास को पोषित करता है, बल्कि सांसारिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन में भी स्पष्टता, संतुलन और विवेक प्रदान करता है। आश्रम का यह उद्घाटन इस श्रेष्ठ उद्देश्य की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह नवीन आध्यात्मिक केंद्र भक्तों एवं साधकों के लिए दिव्य ज्ञान का प्रकाशस्तंभ साबित होगा, जहां आसपास क्षेत्र के लोग नियमित रूप से सत्संग, भजन, ध्यान सत्रों तथा सेवा कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। इन प्रयासों के माध्यम से आश्रम का उद्देश्य लोगों को आंतरिक रूपांतरण के लिए प्रोत्साहित करना और आत्म-जागृति से लेकर वैश्विक शांति की व्यापक दृष्टि को साकार करने में सार्थक योगदान देना है।
इस प्रकार, संस्थान के इस नवीन आश्रम का उद्घाटन समारोह प्राचीन वैदिक परंपराओं, आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति-भावना का सुंदर संगम बना। जिसने प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सुप्त दिव्यता के जागरण और मानवता को उद्देश्यपूर्ण, शांतिपूर्ण एवं प्रकाशमय जीवन की ओर मार्गदर्शन हेतु एक सशक्त आध्यात्मिक केंद्र की आधारशिला रखी।

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