व्हाईट-क्रियेटिव मिलकर खेल रहे चुनावी खेल
ग्वालियर। चेंबर आफ कामर्स एंड इण्डस्ट्रीज से जुड़े लोग कुछ भी कहे, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष डा. प्रवीण अग्रवाल को जानबूझकर माइनस करके व्हाईट हाउस ने क्रियेटिव हाउस के कर्ताधर्ताओं से अपनी पींगे बढ़ा ली है और जानबूझकर दोनों हाउस ने सीटों का कागजी बंटवारा कर लिया है और जिनको जिताना है उनके आगे दूसरे ग्रुप के कमजोर प्रत्याशी उतरवाने की सुपारी ले ली हैं।
क्रियेटिव हाउस में तो उससे जुड़े वफादार लोगों को आज सर्वेसर्वा रहे स्व. विष्णु गर्ग की कमी खलने लगी हैं। स्व. विष्णु गर्ग जिस दमदारी से अपने क्रियेटिव हाउस के प्रत्याशी उतारा करते थे, वह दमदारी अब क्रियेटिव के विजय गोयल, हेमंत गुप्ता, राधेश्याम भाकर व सुरेश बंसल में दिखाई नहीं दे रही है। इससे सुरेश बंसल तो स्वयं संयुक्त अध्यक्ष पद पर लड़ने की रणनीति में लगे हैं। आशुतोष माहेश्वरी के संयुक्त अध्यक्ष पद पर लड़ने की मनाही के बाद कोई नया नवेला प्रत्याशी सुरेश बंसल के सामने व्हाईट हाउस उतारेगा।
इसी क्रम में क्रियेटिव हाउस के एक दिग्गज ने अपने पुत्र को लड़ाने के लिये व्हाईट के अरविंद अग्रवाल से गोपनीय मुलाकात की हैं, ताकि सामने कमजोर प्रत्याशी मिले। कुल मिलाकर दोनों हाउसों में केवल दिखावे की नूरा कुश्ती चल रही हैं। क्रियेटिव हाउस अब जान बूझकर व्हाईट के पारस जैन के सामने अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी भी सरेंडर कर सकता है। वैसे ऐसा पहली बार देखा गया कि चेंबर के चुनाव में दोनों हाउस मिलजुल कर ताश के पत्ते फेंट रहे है उनकी थीम है कि जो भी जीते वह आपस के हो। इससे चाहे व्यापारी व चेंबर हित भले ही ताक पर रख दिये जाये।