भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति के जनक थे स्व. राजीव गांधीः विधायक डाॅ. सिकरवार
ग्वालियर। वे राजीव गांधी जी ही थे, जिन्होंने भारत के लोगों को 21वीं सदी का सपना दिखाया था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश में सूचना क्रांति और दूरसंचार क्रांति की नींव रखी। उन्हें भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति का जनक माना जाता है। यह विचार विधायक डाॅ. सतीश सिकरवार ने ललितपुर काॅलोनी कार्यालय पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी के पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये। कार्यक्रम की शुरूआत में विधायक डाॅ. सतीश सिकरवार एवं अन्य अतिथियों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया एवं ‘राजीव गांधी अमर रहे’ के नारें से कार्यालय गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शहर जिला कांग्रेस कमेटी पूर्व अध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र शर्मा, महाराज सिंह पटेल, प्रदेश प्रवक्ता राम पाण्डे, सेवादल जिलाध्यक्ष हरेन्द्र गुर्जर, एम.आई.सी सदस्य एवं पार्षद अवधेश कौरव, चेम्बर ऑफ काॅमर्स के उपाध्यक्ष डाॅ. राकेश अग्रवाल, ब्लाॅक अध्यक्ष विनोद जैन, राजेश तोमर, श्रीमती रेखा जाटव, अनूप शिवहरे, संदीप यादव, बेताल गुर्जर, सीमा समाधिया, वीणा भारद्वाज, पूर्व पार्षद रामअवतार जाटव, पार्षद प्रमोद खरे, पार्षद अंकित कठठ्ल, पार्षद सुरेन्द्र साहू, श्रीमती संजना राजावत आदि मौजूद रहे।
विधायक डाॅ. सिकरवार ने कहा कि राजीव गांधी भारत में सूचना क्रान्ति के जनक माने जाते हैं. देश के कम्प्यूटराइजेशन और टेलीकम्युनिकेशन क्रान्ति का श्रेय उन्हें जाता है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत रिजर्वेशन दिलवाने का काम उन्होंने किया। मतदाता की उम्र 21 वर्ष से कम करके 18 वर्ष तक के युवाओं को चुनाव में वोट देने का अधिकार राजीव गांधी ने दिलवाया। उन्होंने कहा कि दिनांक 21 मई 1991 में लिट्टे के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हुई थी। स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि को देश आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में भी मनाता है। प्रधानमंत्री रहते हुए स्व. गांधी ने कई ऐसे काम किए, जिन्होंने देश की दिशा बदल दी। पुण्यतिथि कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि आज जब एक युवा 18 साल का होता है और वोट डालने के बाद अंगुली की स्याही दिखाते हुए सेल्फी लेता है तो उसका उत्साह देखते ही बनता है, लेकिन इनमें से कई को यह भी पता नहीं होगा कि 18 साल की उम्र में वोट देने का अधिकार आखिर उन्हें कैसे मिला? दरअसल, वे राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने वोटिंग की उम्र 21 साल से घटाकर 18 वर्ष की थी। भारत में कंप्यूटर और संचार क्रांति का श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है। स्व. गांधी का मानना था कि देश की युवा पीढ़ी को आगे ले जाना है तो उसके लिए कंप्यूटर और विज्ञान की शिक्षा जरूरी है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में अन्य अतिथियों द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किये गये।