ग्वालियर। नगर निगम ने सीवर के शोधित पानी को आय का स्रोत बनाकर एक नई मिसाल पेश की है। शहर के सीवरेज पानी को शोधन संयंत्र में साफ कर जल संसाधन विभाग को बेचने से निगम को अब तक 2 करोड़ रुपये की आय हुई है।
निगम आयुक्त संघ प्रिय ने बताया कि शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए निगम तिघरा जलाशय से पानी लेता है, जिसके बदले हर साल जल संसाधन विभाग को लगभग 7 करोड़ 94 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। अब सीवरेज के शोधित पानी की आपूर्ति के बदले जल संसाधन विभाग निगम को शोधित पानी का भुगतान कर रहा है, जिससे निगम की आय में बड़ा इजाफा हुआ है। जलालपुर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और लाल टिपारा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर स्थापित सीवेज शोधन संयंत्र अब शहर की पहचान बनते जा रहे हैं। यहां शोधित पानी का उपयोग खेती और अन्य कार्यों में हो रहा है, जिससे पुनर्चक्रित जल की उपयोगिता साबित हुई है।
जलालपुर और लाल टिपारा स्थित सीवेज शोधन संयंत्रों से शोधित पानी नहरों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पानी से खेतों में गेहूं, धान, सरसों और हरी सब्जियों की शानदार पैदावार हो रही है। किसानों का कहना है कि नियमित पानी मिलने से खेती की लागत घटी है और उत्पादन बढ़ा है, जिससे उन्हें हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का फायदा हो रहा है।
सीवर के पानी को दोबारा उपयोग में लाने से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि नदियों और जल स्रोतों में प्रदूषण भी कम हुआ है। यह पहल पर्यावरण सुरक्षा और आर्थिक विकास—दोनों का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है। जिस पानी को कभी बेकार समझा जाता था, वही आज गांवों में हरियाली और किसानों की खुशहाली का कारण बन रहा है। ग्वालियर नगर निगम की यह पहल दूसरे शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।