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बंगाल जीत के शिल्पकार सुनील बंसल ने रचा इतिहास

(के.के. उपाध्याय)
गंगोत्री से गंगा सागर तक भाजपा की लहर बह रही है । पश्चिमी बंगाल जीत के साथ ही पार्टी के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार हो गया । बंगाल विजय का सपना । आज़ादी के बाद से आज तक यहां भाजपा सत्ता को तरसती रही । आज़ादी के बाद पहली बार भाजपा पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी । इस जीत के रचनाकार ( आर्किटेक्ट) हैं पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुनील बंसल । श्री सुनील बंसल संगठन के कुशल कारीगर हैं । व्यक्ति निर्माण की अद्भुत क्षमता है । किसे क्या काम देना है वे बारीकी से पहचानते हैं । बंगाल में उन्होंने संगठन को मथ दिया । पुराने मिथकों को तोड़ दिया । विजय का इतिहास रच दिया । वे कहते भी हैं जीत के लिए समीकरण नहीं केमिस्ट्री चाहिए । 
पिछले पाँच सालों से वे संगठन की कड़ियों को जोड़ रहे थे । पश्चिम बंगाल के प्रयोग अलग थे । यहाँ भय का राज था । लोग बोलने से डरते थे । वोट डालने नहीं निकलते थे ।इस बार इस भय की दीवार को तोड़ा । लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ जबरदस्त ग़ुस्सा था । इस ग़ुस्से को श्री सुनील बंसल ने हथियार बनाया । ग़ुस्से को पलने दिया । अंत में जनता का सब्र जवाब दे गया । लोग निकल पड़े । मोहर लगा दी कमल पर । बंगाल के हर पाड़ा , हर पोखर में कमल खिल गया । 
*ऐसे रची जीत की कहानी*
कमल मेला - बंगाल संस्कृति की धरती हैं। यहां संगीत । नाटक और कलाकार बसते हैं । इसी कला को कमल मेले लगाकर जनता को जोड़ा । संदेश दिया । भाजपा का जन्म बंगाल में हुआ । बंगाली ने किया । गीत गूँज उठा पलटानो दरकार , चाई बीजेपी सरकार । यह गीत गली गली गूँजने लगा । मानों गीत ने जनता की आवाज़ को स्वर दे दिया । 
*फ़ुटबॉल मैच*
एक आयोजन हुआ फ़ुटबॉल मैच का । विधानसभा स्तर पर फ़ुटबॉल मैच आयोजित किए गए । फ़ुटबॉल बंगाल की जान भी है ।शान भी है । यहाँ फ़ुटबॉल के महान खिलाड़ी मैसी की आदमकद मुर्तियां लगी हुई हैं । इन मैचों के माध्यम से भाजपा ने युवाओं में पैठ बढाई । इन मैचों में बताया कि युवाओं को नौकरी नहीं है । युवा पलायन कर रहे हैं । घर छोड़ रहे हैं । इस फार्मूले ने काम किया । युवाओं को इन मुद्दों ने भीतर तक छुआ । युवा निकल पड़े । यह चुनाव युवाओं ने अपने कंधे पर उठा लिया । 
*महिलाओं ने पासां पलटा*
बंगाल में महिलाएँ क्रांति की प्रतीक हैं । विकास की गाथा वे स्वंय लिखती हैं । यहाँ महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने लगे । यह लड़ाई उनके सम्मान से जुड़ गई । वोट डालने आई एक महिला का दर्द कुछ यूँ समझिए- ‘ ए लाईने दाड़िएछी कारूण एई लड़ाई आमादेर सम्मानेर लड़ाई ‘ । अर्थ यह है कि इस लाईन में हम पैसे पाने के लिए नहीं अपनी इज़्ज़त और सम्मान बचाने के लिए लगे हैं । महिलाओं ने इसे अपने सम्मान के लिए लड़ा । वोट दिया । भय से मुक्त हुई । भाजपा पर भरोसा किया । 
*छोटी छोटी बैठकें*
फरवरी के महीने में बंगाल में माईक प्रतिबंधित रहता है । परीक्षा की वजह से । इस महीने में कुल 1 लाख 65 हजार छोटी छोटी बैठकें भाजपा ने की । इन बैठकों में संदेश साफ दिया । यह लड़ाई बंगाल को बचाने की है । बंगाली को बचाने की है । श्री  सुनील बंसल ने युवाओं को जगा दिया । महिलाओं में अलख जगा दी । यह लड़ाई भाजपा ने नहीं बंगाल के युवाओं ने लड़ी । 
*कैंपेन और नरेटिव* 
पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी के राजनीतिक किले को ढहाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अलग तरह की रणनीति बनाई । इसके लिए राष्ट्रीय मुद्दों की जगह स्थानीय मुद्दों को तरजीह दी गई। लोकल लीडर को प्रोमोट किया गया । केंद्र के शीर्ष नेताओं के सानिध्य में पूरी रणनीति की कमान भूपेन्द्र यादव और सुनील बंसल की टीम ने संभाली। इसके तहत कैंपेन, नैरेटिव और स्ट्रेटजी और माइक्रो मैनेजमेंट पर काम किया गया। अंत में इतिहास रच गया । बंगाल में आज़ादी के बाद पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है ।
*सघन अभियान*
सुनील बंसल ने दो साल पहले ही सघन अभियान शुरू कर दिया था । 
कोलकता की बात करें तो सबसे पहले इसे 142 वार्डों में संगठनात्मक रूप से बांटा गया। एक वार्ड में संगठन से जुडें पांच पदाधिकारी शामिल किए गए जिन्होंने वार्ड के हिसाब से काम करना शुरू किया। आमतौर पर अबतक कोलकता में संगठनात्मक रूप से भारतीय जनता पार्टी ने इलाके को वार्ड में विभाजित नहीं किया था। 
वार्ड प्रमुख को इस बात की जिम्मेदारी दी गई कि वह हार वार्ड के प्रमुख व्यक्तियों से मुलाकात करेंगे । मसलन हाई राइज बिल्डिंग में जाकर वहां के आरडब्लूए के चीफ से मिलेंगे. उनसे अपना सम्पर्क बढ़ाएंगे। इसके साथ ही दशहरा और दीपावली में उन्हें खास तौर पर मोमेंटो गिफ्ट करेंगे।

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