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शाबाश: ब्रोकली की खेती से चमकी अर्जुन की किस्मत

(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियरआधुनिक तकनीक, सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प से खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है। ग्वालियर जिले के ग्राम सोजना के किसान अर्जुन कुशवाह ने यह साबित कर दिखाया है। पारंपरिक फसलों की जगह ब्रोकली (विदेशी गोभी) की खेती अपनाकर उन्होंने अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है और वे दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। 
अर्जुन कुशवाह पहले गेहूँ, सरसों और उड़द जैसी पारंपरिक फसलें उगाते थे। बढ़ती लागत और सीमित लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने पर उन्हें ब्रोकली जैसी नकदी फसल उगाने की सलाह मिली। विभागीय मार्गदर्शन, सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का सहारा और अपनी मेहनत से उन्होंने नई खेती की शुरुआत की। अर्जुन ने उद्यानिकी विभाग से मिली सलाह से अपनी एक एकड़ भूमि पर ड्रिप सिंचाई और प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक अपनाई। इस तकनीक से पानी की बचत हुई, उर्वरकों का बेहतर उपयोग हुआ और फसल की गुणवत्ता में सुधार आया। इसका सीधा लाभ उत्पादन और आय में मिला। ब्रोकली की खेती से अर्जुन को लगभग 2 से 2.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें 1.50 से 1.75 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। यह पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक है।
अर्जुन की सफलता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर राज्य सरकार द्वारा मनाए जा रहे “किसान कल्याण वर्ष” के उद्देश्यों को भी साकार करती है। इस पहल के तहत किसानों को आधुनिक खेती, तकनीकी मार्गदर्शन और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है। अर्जुन कुशवाह कहते हैं कि प्रदेश सरकार की योजनाओं और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से मुझे नई दिशा मिली। आधुनिक खेती अपनाकर अब खेती लाभ का माध्यम बन गई है। हम जैसे छोटे किसान उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।अर्जुन कुशवाह की सफलता ग्वालियर जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी सफलता बताती है कि नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती में समृद्धि का नया रास्ता बनाया जा सकता है।

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