नगर निगम में सख्ती का असर डीजल खपत में 14,488 लीटर की कमी, मार्च में 13.74 लाख रुपये की बचत
ग्वालियर । निगम आयुक्त संघ प्रिय द्वारा प्रशासनिक सख्ती और नियमित मॉनिटरिंग का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। कार्यशाला विभाग की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 में 14,488 लीटर डीजल की उल्लेखनीय बचत हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 13 लाख 74 हजार 911 रुपये है। यह बचत निगम के वित्तीय प्रबंधन में सुधार और संसाधनों के बेहतर उपयोग का संकेत मानी जा रही है।
निगमायुक्त ने आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण को ध्यान में रखते हुए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी वाहनों का तकनीकी परीक्षण कर उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित की जाए। जिन वाहनों में खामियां हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि सेवा प्रभावित न हो।उन्होंने विशेष रूप से निर्देशित किया कि सभी वाहनों में पार्टीशन (कचरे के पृथक्करण हेतु) सही स्थिति में होवाहन नंबर स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य हों। सभी वाहनों का बीमा अनिवार्य रूप से वैध हो। किराए के वाहनों और चालकों पर कड़ी निगरानी
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि निगम द्वारा किराए पर लिए गए वाहनों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि उनका दुरुपयोग न हो और वे निर्धारित कार्यों में ही उपयोग किए जाएं। इसके साथ ही निगमायुक्त ने स्पष्ट कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।निगमायुक्त ने सभी डिपो प्रभारियों को वाहन संचालन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वाहन का एक निर्धारित रूट तय हो। सभी वाहन समय पर अपने कार्य के लिए निकलें न्यूनतम एक वाहन प्रतिदिन तीन चक्कर अवश्य लगाए। इससे न केवल कार्य क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ईंधन की अनावश्यक खपत पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सही उपयोग ही निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद करेगा।
बैठक के दौरान विभागवार डीजल खपत का गहन विश्लेषण किया गया। समीक्षा में यह पाया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष खपत में उल्लेखनीय कमी आई है, जो बेहतर निगरानी और जवाबदेही का परिणाम है।
निगमायुक्त ने नोडल अधिकारी कार्यशाला को निर्देशित किया कि प्रत्येक विभाग को उनके वाहनों की डीजल खपत की नियमित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इससे संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि वाहन निर्धारित मात्रा में मिले डीजल के अनुरूप ही संचालित हो रहे हैं या नहीं। बैठक में अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव, कार्यपालन यंत्री सुरेश अहिरवार, नोडल अधिकारी कार्यशाला पुष्पेंद्र श्रीवास्तव, उपयंत्री श्रीमती ग्रीष्मा उपस्थित रहे।