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सफलता की कहानी: पीएमईजीपी की संजीवनी से धर्मेश ने खड़ा किया रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग


(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर ।  संकल्प अगर अडिग हो और उसे सरकारी योजनाओं का संबल मिल जाए, तो सफलता की ऊँचाइयां छूना आसान हो जाता है। इस बात को ग्वालियर के एक ऊर्जावान युवा उद्यमी धर्मेश जैन ने न केवल सच कर दिखाया है, बल्कि आज वे हजारों युवाओं के लिए रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। धर्मेश ने “प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम” (पीएमईजीपी) से मिली मदद की बदौलत “अंकित क्रिएशन” के नाम से फलता-फूलता रेडीमेड गारमेंट्स उद्यम स्थापित कर लिया है। 
शहर के नाहर खाना गश्त का ताजिया क्षेत्र के निवासी धर्मेश जैन के मन में हमेशा से अपना कुछ करने का जज्बा था। उन्हें तलाश थी एक ऐसे अवसर की जो उनके हुनर को पंख दे सके। इसी दौरान उन्हें सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने 25 लाख रुपये के ऋण के लिए जिला उद्योग केन्द्र के सहयोग से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सराफा बाजार शाखा में आवेदन किया। पीएमईजीपी के तहत बैंक के माध्यम से मंजूर हुई वित्तीय सहायता ने उनकी राह आसान कर दी । उन्होंने अगस्त 2021 में "अंकित क्रिएशन" के नाम से रेडीमेड गारमेंट निर्माण इकाई की नींव रखी । धर्मेश जैन ने अपने उद्यम की शुरूआत सीमित संसाधनों से छोटे स्तर पर की, लेकिन धर्मेश की दृष्टि वैश्विक स्तर की थी। उन्होंने बाजार की मांग को समझा और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। उनके उत्पादों की फिनिशिंग और डिजाइन ने देखते ही देखते बाजार में अपनी जगह बना ली। आज स्थिति यह है कि मात्र कुछ ही वर्षों के अंतराल में उनकी इकाई का वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
धर्मेश जैन की सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दर्जनों स्थानीय परिवारों को रोजगार प्रदान किया है। उनकी इकाई में काम करने वाले कारीगरों और श्रमिकों के लिए 'अंकित क्रिएशन' आज आजीविका का सबसे भरोसेमंद केंद्र है। यह आत्मनिर्भर भारत की उस परिकल्पना को साकार करता है, जहाँ एक उद्यमी समाज के आर्थिक सशक्तिकरण का जरिया बनता है। वर्तमान में उनकी औद्योगिक इकाई में 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है। अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और सरकारी सहयोग को देते हुए धर्मेश कहते हैंकि युवाओं को केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार की दिशा में सोचना चाहिए। पीएमईजीपी जैसी योजनाएं हम जैसे मध्यमवर्गीय युवाओं के लिए वरदान हैं। अगर आपके पास एक ठोस बिजनेस आइडिया है, तो सरकार उसे जमीन पर उतारने के लिए तैयार खड़ी है। धर्मेश जैन की सफलता की यह गाथा सिद्ध करती है कि ग्वालियर की मिट्टी में उद्यमिता के बीज मौजूद हैं, जिन्हें बस सही खाद और पानी की जरूरत है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाएँ केवल कागजी आंकड़े नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। आज धर्मेश जैन न केवल एक सफल व्यवसायी हैं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और 'लोकल फॉर वोकल' अभियान के एक चमकते हुए सितारे हैं। 


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