स्वदेशी मेले में आज स्वावलंबन और स्वाभिमान की भावना को साकार करेगा रानी लक्ष्मीबाई महानाट्य
350 साल का इतिहास 60 मिनट में दिखेगा, आतिशबाजी के बीच साकार होंगे लक्ष्मीबाई और शिवाजी के शौर्य प्रसंग
ग्वालियर। स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाली वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा सोमवार शाम ग्वालियर व्यापार मेला परिसर में जीवंत होगी। स्वदेशी मेला-दीपोत्सव 2026 में शाम 6:30 बजे से ध्वनि एवं प्रकाश पर आधारित महानाट्य का मंचन किया जाएगा। 60 मिनट की इस प्रस्तुति में 80 दृश्यों के माध्यम से भारत के 350 वर्षों के इतिहास को समेटा गया है। 4 वर्ष से लेकर 65 वर्ष तक की आयु के कलाकार इसमें भागीदारी करेंगे।
महानाट्य में महारानी लक्ष्मीबाई की नेतृत्व क्षमता, युद्ध कौशल, घुड़सवारी और तलवारबाजी का विहंगम प्रदर्शन देखने को मिलेगा। उनके जीवन के प्रमुख प्रसंगों के साथ हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्य भी मंच पर साकार होगा। महारानी लक्ष्मीबाई के विवाह समारोह और छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के प्रसंगों में आतिशबाजी का प्रयोग किया जाएगा। ध्वनि, प्रकाश और आतिशबाजी के संयोजन से ऐतिहासिक घटनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारी की गई है।
महानाट्य के लेखक एवं निर्देशक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि प्रस्तुति के लिए 100 कलाकार पिछले 15 दिनों से रिहर्सल कर रहे हैं। ग्वालियर सहित देश के विभिन्न स्थानों पर इस महानाट्य का मंचन हो चुका है। इसमें अलग-अलग आयु वर्ग के कलाकार अपनी भूमिका निभाएंगे। प्रस्तुति के माध्यम से वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस, नेतृत्व क्षमता और देश के लिए उनके बलिदान को दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और स्वराज की स्थापना के संघर्ष को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
महानाट्य में संगीत निर्देशन धर्मेंद्र सिंह एवं नवनीत कौशल का है। सेट डिजाइन प्रवीण अग्रवाल कर रहे हैं, जबकि कलाकारों की रूपसज्जा नारायण पीरौनिया संभाल रहे हैं। नृत्य संयोजन की जिम्मेदारी मोनिका श्रीवास्तव के पास है। पूरी टीम पिछले कई दिनों से मंचन को प्रभावी बनाने में जुटी है।
स्वदेशी मेले में आयोजित इस महानाट्य के जरिए भारतीय इतिहास, वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े प्रसंगों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।